ब्रिक्स सम्मिट में छाई मिथिला चित्रकला, 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने देखी बिहार की लोक परंपरा प्रदर्शनी

नई दिल्ली के राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय में आयोजित 'मिथिला की लोक परंपरा प्रदर्शनी' ब्रिक्स समिट के दौरान विदेशी मेहमानों के बीच चर्चा का विषय बन गई. 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने बिहार की अनूठी कला और संस्कृति की प्रशंसा की.

Madhubani Art Exhibition: नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी में आयोजित 'मिथिला की लोक परंपरा प्रदर्शनी' ब्रिक्स समिट के दौरान विदेशी मेहमानों के आकर्षण का केंद्र बन गई है. मिथिला चित्रकला संस्थान, मधुबनी द्वारा आयोजित इस विशेष प्रदर्शनी में 20 से अधिक देशों के 50 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने शिरकत की. विदेशी मेहमानों ने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक जीवनशैली और मिथिला पेंटिंग की बारीकियों को देखकर उसकी जमकर प्रशंसा की.

BRICS Summit Mithila Painting: 20 से अधिक देशों के राजनयिकों ने किया कलाकृतियों का अवलोकन

प्रदर्शनी में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, नाइजीरिया, क्यूबा, युगांडा, बेलारूस, थाईलैंड, मलेशिया, वियतनाम, इंडोनेशिया और बोलिविया जैसे देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए. प्रतिनिधियों ने पारंपरिक विधि से तैयार प्राकृतिक रंगों और मिथिला पेंटिंग की महीन रेखाओं की विशिष्ट बनावट को खूब सराहा.

प्राकृतिक रंगों, अरिपन और लोकगाथाओं ने मोहा मन

प्रदर्शनी के दौरान मेहमानों को मिथिला के पर्व-त्योहारों, लोक-जीवन और सांस्कृतिक परंपराओं से रूबरू कराया गया. विदेशी प्रतिनिधियों ने अरिपन, रामायण प्रसंग, कृष्णलीला और राजा सलहेस की लोकगाथा पर आधारित चित्रों में गहरी रुचि दिखाई. चित्रों के माध्यम से मिथिला की लोक-संस्कृति को समझने का यह अनुभव विदेशी मेहमानों के लिए बेहद खास रहा. संस्थान के कनीय आचार्य सह प्रदर्शनी क्यूरेटर प्रतीक प्रभाकर ने प्रतिनिधियों को पेंटिंग की शैली और रंगों के महत्व के बारे में विस्तार से बताया.

पद्मश्री कलाकारों सहित 31 चित्रकारों की 64 कृतियां प्रदर्शित

प्रदर्शनी में कुल 31 कलाकारों की 64 चुनिंदा कलाकृतियों को सजाया गया है. इनमें पद्मश्री बौआ देवी, पद्मश्री दुलारी देवी, पद्मश्री शिवन पासवान के साथ-साथ कनीय आचार्य संजय कुमार जायसवाल और संस्थान के प्रतिभावान विद्यार्थियों की पेंटिंग्स शामिल हैं.

संस्थान के निदेशक ने साझा कीं संरक्षण की योजनाएं

संस्थान के निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह ने आगंतुकों को मिथिला चित्रकला के संरक्षण, संवर्धन और अकादमिक गतिविधियों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि संस्थान किस तरह नई पीढ़ी को इस पारंपरिक कला से जोड़कर वैश्विक मंच पर पहचान दिला रहा है.

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By Kartik Kumar

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