मधुबनी.
कड़ाके की ठंड के कारण उच्च रक्तचाप की समस्या बढ़ती जा रही है. इससे हृदयाघात व ब्रेन स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड के मौसम में लोग सामान्य से कम पानी पीते हैं. इससे रक्त गाढ़ा होने लगता है और रक्त नलिका में संकुचन आ जाता है. इसका सीधा असर रक्तचाप पर पड़ता है और वह अनियंत्रित हो सकता है. सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ विनय कुमार ने कहा कि ठंड के मौसम में पर्याप्त मात्रा में गुनगुने पानी का सेवन शरीर की तरल आवश्यकताओं को पूरा करता है. रक्त संचार बेहतर बनाए रखने में मदद करता है. उन्होंने कहा कि इस मौसम में हमारी आर्टी में सिकुड़न बढ़ जाती है. ऐसे में रात में सोने से पहले एक गिलास गर्म या गुनगुना पानी पीना हृदय और मस्तिष्क से जुड़ी जटिलताओं के जोखिम को कम करने में सहायक माना जाता है. उन्होंने कहा कि सर्दियों में उच्च प्रोटीन युक्त और सुपाच्य भोजन का सेवन करना चाहिए. ताकि शरीर की ऊर्जा बनी रहे और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो सके. नमक का सेवन प्रतिदिन पांच ग्राम से अधिक नहीं करें. कारण अधिक नमक रक्तचाप को तेजी से बढ़ा सकता है.ठंड में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का बढ़ जाता है खतरा
विशेषज्ञ चिकित्सा पदाधिकारी डॉ प्रभात कुमार झा ने बताया कि इस मौसम में अचानक बीपी शूट करने की संभावना होती है. ऐसे में सुबह में खुले मैदान में टहलने ना जाएं. धूप निकलने पर ही टहले. यदि धूप ना निकले तो घर में ही आवश्यक व्यायाम व प्रणायाम करें. उन्होंने कहा कि नियमित हल्का व्यायाम, टहलना और सक्रिय दिनचर्या अपनाने से भी रक्तचाप नियंत्रित रहता है. संतुलित खानपान, पर्याप्त पानी और नियमित शारीरिक गतिविधि के माध्यम से सर्दियों में उच्च रक्तचाप और इससे होने वाले गंभीर परिणामों से काफी हद तक बचाव संभव है.जीवनशैली और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
सदर अस्पताल के चिकित्सक प्रभात कुमार झा ने कहा कि ब्रेन हैमरेज (मस्तिष्क में रक्तस्राव) एक गंभीर और जानलेवा है. लेकिन सही दिनचर्या, समय पर जांच और सावधानी से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि उच्च रक्तचाप ब्रेन हैमरेज का सबसे बड़ा कारण है. नियमित रूप से बीपी की जांच कराएं. दवाएं समय पर लें. हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और कम वसा वाला भोजन अपनाएं.
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