जिस कचरा प्रबंधन इकाई को साफ रखना था, वहीं लगा कचरे का ढेर, 3 पंचायतों में व्यवस्था पर सवाल

लदनियां की तीन पंचायतों में कचरा प्रबंधन व्यवस्था सवालों के घेरे में है. पद्मा पंचायत में प्लास्टिक और घरेलू कचरा खुले में फैला है, जबकि कुमरखत पूर्वी और पश्चिमी पंचायतों में भी स्थिति खराब बतायी जा रही है.

लदनियां कचरा प्रबंधन: ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए संचालित लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान की जमीनी हकीकत लदनियां प्रखंड की पद्मा, कुमरखत पूर्वी और कुमरखत पश्चिमी पंचायत में सवाल खड़े कर रही है. जिन कचरा प्रबंधन इकाइयों का उद्देश्य गांव से निकलने वाले कचरे का संग्रहण, पृथक्करण और सुरक्षित निस्तारण करना है, वहीं परिसर में कचरे का ढेर लगा हुआ है.

खुले में बिखरा है घरेलू कचरा

पद्मा पंचायत की कचरा प्रबंधन इकाई के आसपास प्लास्टिक, पॉलीथिन, खाद्य पदार्थों के पैकेट, कागज और अन्य घरेलू कचरा खुले में बिखरा पड़ा है. कचरे का ढेर इकाई परिसर से बाहर तक फैल गया है. आसपास गंदगी का आलम ऐसा है कि स्वच्छता अभियान का उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आता दिख रहा है.

कचरा प्रबंधन स्थल के ठीक बगल में कृषि योग्य खेत भी हैं. ऐसे में खुले में पड़े प्लास्टिक और पॉलीथिन के खेतों तक पहुंचने से कृषि भूमि और पर्यावरण पर संभावित दुष्प्रभाव को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं.

वाहन होने के बाद भी नहीं हो रहा नियमित उठाव

ग्रामीणों के अनुसार कचरा उठाव के लिए वाहन की व्यवस्था की गयी है. इसके बावजूद कचरा प्रबंधन इकाई के आसपास लगातार कचरा जमा होना व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है. लोगों का कहना है कि यदि कचरे का नियमित उठाव, पृथक्करण और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण हो रहा होता तो इकाई के आसपास कचरे का इतना बड़ा ढेर नजर नहीं आता.

ग्रामीणों के मुताबिक स्वच्छता अभियान की सफलता सिर्फ घर-घर से कचरा उठाने तक सीमित नहीं है. कचरे को अलग-अलग करने और उसका सुरक्षित निस्तारण करना भी उतना ही जरूरी है.

दुर्गंध और संक्रमण का बढ़ रहा खतरा

खुले में लंबे समय तक कचरा जमा रहने से आसपास दुर्गंध फैलने के साथ मच्छर-मक्खियों का प्रकोप बढ़ने की आशंका है. इससे संक्रमण का खतरा भी बना रहता है. वहीं प्लास्टिक और पॉलीथिन के आसपास फैलने से पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है.

ग्रामीणों का कहना है कि जिस व्यवस्था के जरिए पंचायतों को स्वच्छ रखने का लक्ष्य है, उसी के आसपास गंदगी का अंबार लगा रहना चिंता का विषय है.

कुमरखत की दोनों पंचायतों में भी यही स्थिति

पद्मा के अलावा कुमरखत पूर्वी और कुमरखत पश्चिमी पंचायत की कचरा प्रबंधन इकाइयों की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही बतायी जा रही है. ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से इन इकाइयों की जांच कराने की मांग की है.

लोगों ने नियमित कचरा संग्रहण, कचरे के पृथक्करण और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग की है, ताकि स्वच्छता अभियान का लाभ वास्तव में ग्रामीणों और पर्यावरण तक पहुंच सके.

यह भी पढे़ं:

मधुबनी में मछली की बंपर पैदावार, 50 हजार लोगों को मिला रोजगार

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Tarachand prasad

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >