कचरा प्रबंधन इकाइयों की बदहाली से लदनियां में संक्रमण का खतरा, ग्रामीणों ने उठाई जांच की मांग

लदनियां के पद्मा और कुमरखत पंचायतों में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान की बदहाल स्थिति। कचरा प्रबंधन इकाई बनी कचरे का ढेर, ग्रामीणों में भारी आक्रोश।

लोहिया स्वच्छता लदनियां: मधुबनी जिले के लदनियां प्रखंड में ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया 'लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान' जमीनी स्तर पर दम तोड़ता नजर आ रहा है. प्रखंड की पद्मा, कुमरखत पूर्वी एवं कुमरखत पश्चिमी पंचायतों में स्वच्छता अभियान की हकीकत बेहद बदहाल है. जिस कचरा प्रबंधन इकाई (WPU) का मुख्य उद्देश्य गांवों से निकलने वाले कचरे का समुचित संग्रहण, वैज्ञानिक पृथक्करण और सुरक्षित निस्तारण करना था, वे इकाइयां आज खुद कचरे के विशाल ढेर में तब्दील हो चुकी हैं.

पद्मा पंचायत में परिसर से बाहर तक फैला अपशिष्ट

पद्मा पंचायत स्थित कचरा प्रबंधन इकाई के आसपास भारी मात्रा में कचरा खुले में बिखरा पड़ा है. प्लास्टिक, पॉलीथिन, खाद्य पदार्थों के पैकेट, बोतलें, कागज और अन्य घरेलू ठोस अपशिष्ट से पूरा परिसर पटा हुआ है. कचरे का यह अंबार अब इकाई की चहारदीवारी से बाहर निकलकर आसपास के खुले क्षेत्रों तक फैल चुका है. कचरा प्रबंधन स्थल के ठीक बगल में उपजाऊ कृषि योग्य खेत हैं, जहां यह प्लास्टिक उड़कर पहुंच रहा है.

खुले में कचरा डंप होने से उपजी प्रमुख समस्याएं:

  • पर्यावरण व खेती को नुकसान: खेतों में पॉलीथिन और प्लास्टिक फैलने से कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति और मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है.
  • संक्रमण और बीमारियों का खतरा: खुले में सड़ रहे कचरे से उठने वाली तीव्र दुर्गंध के कारण मच्छर-मक्खियों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे संक्रामक बीमारियां फैलने का डर है.
  • संसाधनों की अनदेखी: घर-घर से कचरा उठाव के लिए वाहन उपलब्ध होने के बावजूद वैज्ञानिक निस्तारण न होना व्यवस्था की लापरवाही को दर्शाता है.

जांच और नियमित निस्तारण की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ घरों से कचरा उठाना ही स्वच्छता नहीं है, बल्कि उसका वैज्ञानिक निस्तारण आवश्यक है. कुमरखत पूर्वी और कुमरखत पश्चिमी पंचायतों में भी हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं. ग्रामीणों ने जिला व प्रखंड स्तरीय अधिकारियों से कचरा प्रबंधन इकाइयों की अविलंब जांच कराने तथा कचरा पृथक्करण और उचित निस्तारण व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग की है.

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By Tarachand prasad

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