Madhubani : जीविका से बदली जिंदगी, आत्मनिर्भर बन रहीं जीविका दीदी

ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बदलने में जीविका की भूमिका अहम है.

दीदी की रसोई का सालाना व्यवसाय हुआ 20 से 25 लाख रुपये दीदी की रसोई से प्रतिमाह हो रहा एक से डेढ़ लाख की कमाई मधुबनी . ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बदलने में जीविका की भूमिका अहम है. जीविका समूह के माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भर एवं सशक्त बन रही है. सदर अस्पताल में जीविका दीदी द्वारा संचालित दीदी की रसोई में कार्यरत जीविका दीदी के सामाजिक एवं शैक्षणिक स्थिति में सुधार हो रही है. दीदी की रसोई का सालाना व्यवसाय 20-25 लाख रुपये तक पहुंच गया है. जबकि दीदी की रसोई का मासिक मुनाफा एक से डेढ़ लाख रुपये के करीब है. विदित हो कि सदर अस्पताल में दीदी की रसोई की शुरुआत वर्ष 2021 में 1 लाख रुपये से की गई थी. बीते 4 वर्षों में इसके व्यवसाय में 20-25 गुणा की वृद्धि हुई है. इसके कारण इससे जुड़ी जीविका दीदी की जिंदगी बदल रही है. जीविका में जुड़ने पहले यह महिलाएं मुफलिसी में दिन कट रहे थी. वहीं अब यह सभी स्वावलंबी बन गई हैं. इतना ही नहीं खुद की आर्थिकी स्थिति सुधारने के साथ साथ अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ा रही है. शादी विवाह सहित अन्य कार्यों को बेहतर ढंग से कर रहीं हैं. स्वाबलंबी हुईं हैं जीविका दीदी सदर अस्पताल में जीविका द्वारा संचालित कैंटीन की जीविका दीदी द्वारा न केवल मरीजों को गुणवत्तापूर्ण खाना परोसा जा रहा है, अपितु उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है. कैंटीन में 6 महिलाएं कार्यरत हैं. इसमें 3 जीविका दीदी विधवा है. पति के गुजर जाने के बाद गुजारा करना मुश्किल हो रहा था. कैंटीन में काम करने वाली दीदी पूनम बताती है 2010 में पति के देहांत के बाद आर्थिक तंगी की शिकार थीं, लेकिन जीविका ने आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के साथ ही मुखर भी बना दिया है. इसमें उन्हें 1500 रुपये का गुजारा भत्ता मिलता था. लेकिन वर्तमान में वह विश्वास सीएफएल द्वारा संचालित सदर अस्पताल के कैंटीन में कार्यरत हैं. उन्होंने बताया कि इसमें 6 दीदी कार्यरत हैं पूनम , लीला, कृष्ण, संजू, सुनीता, रामकली शुरुआत में इन्हें 6000 रुपये मासिक मिलता था. वर्तमान में 9000 रुपये मिल रहा है. वहीं राधा देवी व शांति देवी कैंटीन की साफ सफाई में लगी हुई है. उन्हें 4500 रुपये प्रतिमाह दिया जाता है. इससे वह अपने बच्चों का पालन पोषण अच्छे ढंग से कर रही है. अस्पताल में प्रतिदिन 85 से 90 मरीजों के अलावा दर्जनों की संख्या में परिजनों, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को घर जैसा स्वादिष्ट भोजन परोसती हैं. पुरूषों पर निर्भरता हुई कम डीपीएम ने बताया कि जीविका से जुड़ी महिलाएं सशक्त व आत्मनिर्भर बन रही है. इसके लिए सरकार का लगातार प्रयास भी सराहनीय है. ताकि अपने घर परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत कर सकें. अब घर के पुरुषों पर निर्भरता कम हुई है. वहीं दोनों के कमाई से बच्चों की पढ़ाई, बिटिया की शादी व घर के अन्य तरह के खर्चों में भी मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ रहा है.

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