Madhubani News: नगर परिषद झंझारपुर क्षेत्र में दिन के समय भी स्ट्रीट लाइट, तिरंगा लाइट और हाईमास्ट लाइटें जलती रहने से सरकारी बिजली की भारी बर्बादी हो रही है. शहर के कई हिस्सों में 24 घंटे पोलों पर लाइटें जलती रहती हैं, लेकिन इन्हें बंद करने की प्रभावी व्यवस्था नहीं दिख रही है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगहों पर आम नागरिक खुद लाइट बंद करते नजर आते हैं, जबकि अधिकांश इलाकों में दिनभर लाइटें जलती रहती हैं. इससे न केवल ऊर्जा की बर्बादी हो रही है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंच रहा है.
हर महीने 14 लाख का बिजली बिल
सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार, नगर परिषद क्षेत्र में करीब 2600 स्ट्रीट लाइट, 350 तिरंगा लाइट और पांच हाईमास्ट लाइटें लगी हुई हैं.
विद्युत विभाग के एसडीओ रमेश कुमार के अनुसार, तिरंगा लाइट के लिए 20 किलोवाट, स्ट्रीट लाइट के लिए 314 किलोवाट और पांच हाईमास्ट लाइट के लिए 12 किलोवाट लोड स्वीकृत है. लगभग चार हजार रुपये प्रति किलोवाट की दर से नगर परिषद को हर महीने करीब 14 लाख रुपये बिजली बिल के रूप में भुगतान करना पड़ता है.
34 लाख लेने वाली एजेंसी पर सवाल
नगर परिषद के 27 वार्डों में स्ट्रीट लाइट ऑन-ऑफ करने की जिम्मेदारी एक एजेंसी को दी गई है. इसके एवज में एजेंसी को प्रतिमाह 34 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया जाता है.
इसके बावजूद एजेंसी की लापरवाही के कारण दिन में भी लाइटें जलती रहती हैं. इससे ऊर्जा की बर्बादी के साथ-साथ स्ट्रीट लाइटों की गुणवत्ता और उनकी आयु पर भी असर पड़ रहा है.
कार्यपालक पदाधिकारी ने माना नुकसान
नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मनोज कुमार ने स्वीकार किया कि दिन में स्ट्रीट लाइट जलना सरकारी ऊर्जा की बर्बादी है. उन्होंने कहा कि इससे लाइटें समय से पहले खराब भी हो रही हैं.
उन्होंने बताया कि इस मामले में संबंधित एजेंसी को दोबारा नोटिस भेजा जा रहा है और व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए हैं.
मधुबनी के झंझारपुर से संजय कर्ण की रिपोर्ट
