प्रतिनिधि, मधुबनीपरिवार न्यायालय के न्यायाधीश जय किशोर दुबे ने भरण-पोषण राशि का भुगतान करने से इनकार करने वाले पति को 30 दिनों के कारावास की सजा सुनायी है. न्यायालय के आदेश के बाद पति पंडौल थाना क्षेत्र के अमीत चौधरी को न्यायिक अभिरक्षा में मंडल कारा भेज दिया.
आवेदिका के अधिवक्ता आरिफ हुसैन के अनुसार पति अमित चौधरी के विरुद्ध उसकी पत्नी पूर्णिमा देवी अपने पुत्र के लिए 2019 में भरण-पोषण का वाद दायर किया था. सुनवाई के बाद परिवार न्यायालय ने पत्नी के पक्ष में निर्णय देते हुए पति को प्रतिमाह 10 हजार रुपये भरण-पोषण राशि देने का आदेश दिया था. इसके बावजूद पति ने न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया. भरण-पोषण राशि का भुगतान नहीं होने पर पत्नी ने भरण पोषण की बकाया राशि एक लाख दस हजार रुपये वसूली के लिए न्यायालय में 2025 में विविध वाद दायर किया था. मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पति अमित चौधरी के विरुद्ध डिस्ट्रेस वारंट जारी किया था. वारंट के आलोक में पंडौल पुलिस उसे गिरफ्तार कर परिवार न्यायालय में पेश किया था. न्यायालय में पेशी के दौरान न्यायाधीश ने बकाया भरण-पोषण राशि जमा करने का अवसर दिया. लेकिन पति ने राशि देने से इनकार कर दिया. इसके बाद परिवार न्यायालय के न्यायाधीश ने आदेश का अनुपालन नहीं करने को गंभीरता से लेते हुए उसे 30 दिनों के लिए जेल भेजने का आदेश दिया है. हालांकि न्यायालय ने यह भी आदेश दिया है कि 30 दिनों के अंदर बकाया राशि जमा करने पर पति को रिहा हो सकते है. 2017 में शादी 2019 वाद दायर आवेदिका के अधिवक्ता के अनुसार, आवेदिका की शादी 26 जून 2017 को हुई थी. शादी के बाद पति अमित चौधरी और उसके परिजन दो लाख रुपये दहेज के लिए प्रताड़ना करने लगे. 1 जून 2019 को आवेदिका को घर से भगा दिया गया. इसके बाद 19 नवंबर 2019 को आवेदिका ने अपने और अपने पुत्र के भरण पोषण के लिए परिवार न्यायालय में वाद दायर की थी. न्यायालय ने 11 नवंबर 2022 को आवेदिका और उसके पुत्र के लिए दस हजार रुपये प्रतिमाह देने का आदेश जारी किया था, लेकिन भरण पोषण राशि नही देने पर आवेदिका ने भरण पोषण राशि 1 लाख 10 हजार रुपये के लिए 2023 में विविध वाद दायर किया. न्यायालय में पति के उपस्थित नहीं होने पर न्यायालय ने डिस्ट्रेस वारंट जारी किया था. इसके बाद पुलिस वारंट पर पति को न्यायालय में पेश किया था.
