Madhubani News : बाल वैज्ञानिकों की क्षमता से नवीकरण को मिलेगा बढ़ावा : माधव आनंद

बिहार बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम-2025 के तहत परियोजना प्रस्तुतीकरण शनिवार को रीजनल सेकेंडरी स्कूल में शुरू हुआ.

मधुबनी. बिहार बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम-2025 के तहत परियोजना प्रस्तुतीकरण शनिवार को रीजनल सेकेंडरी स्कूल में शुरू हुआ. कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक माधव आनंद, डीपीओ माध्यमिक शिक्षा कुंदन कुमार, डीपीओ एसएसए शुभम कुशोधन, संरक्षक सह रीजनल सेकेंडरी स्कूल के निदेशक डाॅ. आरएस पांडेय, शैक्षणिक समन्वयक सह प्राचार्य डाॅ. मनोज कुमार झा, डाॅ. मिथिलेश कुमार झा, प्रो. डाॅ. कुमरजी राउत, डाॅ. मीना झा, प्रो. अरिंदम कुमार ने किया. दो दिवसीय कार्यक्रम में सूबे के सात जिलों के चयनित प्रतिभागी, स्काॅट शिक्षक एवं जिला समन्वयक, क्षेत्रीय समन्वयक पहुंचे. मुख्य अतिथि विधायक माधव आनंद ने कहा कि बाल वैज्ञानिकों में जो क्षमता है, वह नवीकरण को बढ़ावा देगा. कृषि से जुड़ा विषय है जो समाज के लिए लाभकारी है. उन्होंने कहा कि एआइ का जमाना है. ऐसे में बाल वैज्ञानिकों की भूमिका आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगी. डीपीओ माध्यमिक शिक्षा कुंदन कुमार ने कहा कि प्राकृतिक संसाधान को बचाना बहुत जरुरी है. प्राकृतिक संसाधन का दोहन हो रहा है, जो चिंता का विषय है. बाल वैज्ञानिक अपने शोध के द्वारा प्राकृतिक संसाधनों को भविष्य के लिए बचाने का उपाय करें ताकि आने वाली पीढी को बचाया जा सके. डीपीओ एसएसए शुभम कुशोधन ने कहा कि विभिन्न जिलो से पहुंची प्रतिभागी अपने शोध के माध्यम से नवीकरण को बढ़ावा देंगे. बच्चों में विज्ञान के प्रति जागरुकता पैदा करना शिक्षकों का दायित्व है. डा. आर एस पांडेय ने कहा कि विज्ञान से ही समाज और देश का विकास संभव है. उन्होंने कहा कि आज मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखना और जल संरक्षण एक चैलेंज है. जिसे बच्चे अपने नवाचार द्वारा समाधान का रास्ता बता रहे है. शैक्षणिक समन्वयक डॉ मनोज कुमार झा ने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन सामयिक विषय है. इसमें बच्चों ने अच्छा काम किया है. क्षेत्रीय समन्वयक कृष्ण कुमार ने कहा कि यहां से चयनित बच्चे राज्यस्तरीय कार्यक्रम में भाग लेंगे. उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं मधुबनी में राष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन हो. डॉ कुमरजी राउत ने कहा कि खाद सामग्री का बेहतर उत्पादन, भंडारण एवं परिष्करण तथा मौसम जलवायु व कृषि पर और काम करने की जरुरत है. वहीं डाॅ. मिथिलेश कुमार झा ने कहा कि ये कार्यक्रम बच्चों में नवाचार को बढ़ावा देता है. डॉ अरिंदम कुमार ने कहा कि बिहार बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम बच्चों में नवाचार का एक बेहतर प्लेटफॉर्म है. डाॅ.मीना झा ने कहा कि आज कृषि आधारित नवाचार को बढ़ावा देने की जरुरत है. बिहार कृष प्रधान राज्य है। ऐसे में इस पर काम जरूरी है। शिक्षिका बागेश्वरी देवी ने कहा कि बच्चों को कुछ नया करने के लिए ये बहुत अच्छा कार्यक्रम है. शैक्षणिक निदेशक ई. प्रत्यूष परिमल ने कहा कि बाल वैज्ञानिक हमारे देश के भविष्य है. इनका नवाचार देश और समाज को दिशा देगा. मौके पर डाॅ. धीरेंद्र कुमार, डाॅ. संजीव कुमार, प्रो. अंजीत कुमार ठाकुर, सीताराम यादव, रविन्द्र झा, अमित कुमार शाही, राधा मोहन झा, श्रुति खन्ना, शैलेंद्र कुमार पांडेय, शैलेंद्र मोहन झा, ऋषि कुमार झा, सुमित कुमार चौधरी, स्वेता कुमारी, नवनीत कुमार, पवन कुमार सिंह, प्रेमनाथ गोसाई, वाटसन हाई स्कूल की शिक्षिका नेहा कुमारी सहित जिले के कई शिक्षक और शिक्षिका मौजूद थे. सात जिलों के 50 से अधिक बाल वैज्ञानिक भाग ले रहे बिहार बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम 2025 अंतर्गत क्षेत्रीय कार्यक्रम में सात जिलों के 50 से अधिक बाल वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं. रीजनल सेकेंडरी स्कूल जीबछ चौक सप्ता मधुबनी में आयोजित दो दिवसीय इस कार्यक्रम में मधुबनी, दरभंगा, सहरसा, सुपौल, अररिया, पूर्णिया एवं मधेपुरा सहित सात जिला के जिला स्तर पर चयनित बाल वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं. राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद पटना के निर्देशानुसार एवं साइंस फार सोसायटी पटना के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य विषय खाद्य सुरक्षा एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं पांच उप विषय खाद्य सामग्री का बेहतर उत्पादन, भंडारण एवं परिष्करण, जैव विविधता का संवर्धन एवं जैव संसाधनों का सतत उपयोग, खर पतवार का अध्ययन एवं उनका वैकल्पिक उपयोग, मिट्टी का संरक्षण एवं प्रबंधन तथा मौसम, जलवायु एवं कृषि है.

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By GAJENDRA KUMAR

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