Benipatti News: मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड के चतरा गांव स्थित राजकीयकृत मध्य विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है. विद्यालय परिसर में खुले तालाब के कारण हर दिन दुर्घटना की आशंका बनी रहती है, लेकिन लंबे समय से मांग और विभागीय पत्राचार के बावजूद अब तक चारदीवारी का निर्माण शुरू नहीं हो सका है.
खेलते-खेलते तालाब तक पहुंच जाते हैं बच्चे
विद्यालय परिसर में स्थित खुले तालाब के कारण छोटे बच्चे अक्सर खेलते-खेलते उसके किनारे तक पहुंच जाते हैं. इससे अभिभावकों और ग्रामीणों में लगातार चिंता बनी रहती है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, इसलिए चारदीवारी का निर्माण अब बेहद जरूरी हो गया है.
ग्रामीणों ने कई स्तरों पर लगाई गुहार
इस समस्या को लेकर अभिभावक, ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और विद्यालय प्रबंधन कई बार संबंधित अधिकारियों से मांग कर चुके हैं.
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश मंडल ने आरटीएमएस सहयोग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई. शिकायत पर जवाब तो मिला, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी.
विभाग ने लिखा पत्र, फिर भी काम शुरू नहीं
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने 11 जून को बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम (BSEIDC) के मुख्य अभियंता को पत्र भेजकर विद्यालय की चारदीवारी निर्माण की कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया था.
साथ ही बीएसईआईडीसी, मधुबनी के उप प्रबंधक को भी इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने का निर्देश दिया गया था.
लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने भी माना जरूरी
बिहार लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, मधुबनी ने भी अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि विद्यालय के चारों ओर तालाब और अन्य जोखिमपूर्ण स्थान होने के कारण बच्चों की सुरक्षा के लिए चारदीवारी का निर्माण अत्यंत आवश्यक है.
संबंधित अभियंताओं को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ.
ग्रामीणों की मांग- हादसे से पहले हो कार्रवाई
स्थानीय ग्रामीणों, अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि किसी अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को तत्काल चारदीवारी निर्माण शुरू कराना चाहिए.
उनका कहना है कि शिक्षा के साथ बच्चों की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. चारदीवारी बनने से विद्यालय का वातावरण अधिक सुरक्षित होगा और अभिभावकों की चिंता भी कम होगी.
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