Bank Strike: 282 बैंक शाखाओं पर लटके ताले, 200 करोड़ का कारोबार प्रभावित

मधुबनी में बैंक अधिकारियों और कर्मियों की एक दिवसीय हड़ताल के कारण जिले की 282 बैंक शाखाएं बंद रहीं, जिससे करीब 200 करोड़ रुपये के वित्तीय कारोबार पर असर पड़ा. 5-Day Working की मांग को लेकर यह प्रदर्शन हुआ, और मांगें पूरी न होने पर लगातार पांच दिन सेवाओं के प्रभावित रहने की चेतावनी दी गई है.

मधुबनी: ऑल ओवर इंडिया ग्रामीण बैंक यूनाइटेड फोरम तथा ट्रेड यूनियनों के प्रमुख साझा मंच यूनाइटेड फोरम यूनियंस के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर 11 यूनियनों के संयुक्त तत्वावधान में बैंक अधिकारियों व कर्मियों ने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया. इसके कारण जिले की विभिन्न बैंकों की 282 शाखाओं पर ताले लटके रहे. राष्ट्रव्यापी आंदोलन के समर्थन में सार्वजनिक क्षेत्र के साथ-साथ निजी बैंकों के कर्मियों के लामबंद होने से जिले की वित्तीय व्यवस्था दिनभर प्रभावित रही. इससे करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है.

जिले में बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, यूनियन बैंक और बिहार ग्रामीण बैंक सहित अधिकांश प्रमुख राष्ट्रीयकृत व निजी बैंकों की शाखाओं में ताले लटके रहे. इसके कारण चेक क्लियरेंस, नकद जमा-निकासी, ड्राफ्ट निर्माण और व्यापारिक लेन-देन का काम पूरी तरह ठप रहा.

ट्रेड यूनियन नेताओं के अनुसार, एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी आंदोलन के चलते जिले में करीब 200 करोड़ रुपये के वित्तीय कारोबार और बैंकिंग ट्रांजेक्शन प्रभावित होने का अनुमान है. इससे आम उपभोक्ताओं और व्यवसायियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा.

5-Day Working की मांग पर आर-पार की लड़ाई का ऐलान

बैंककर्मियों ने केंद्र सरकार की नीतियों को तानाशाही रवैया करार देते हुए जमकर नारेबाजी की. बिहार ग्रामीण बैंक इम्प्लॉईज और ऑफिसर्स फेडरेशन के संयुक्त नेतृत्व में ग्रामीण बैंक के सभी घटक दलों ने आंदोलन को अपना पूर्ण और सक्रिय समर्थन दिया.

वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से 5-Day Working की वैध मांग लंबित रखी गयी है, जबकि वित्तीय क्षेत्र के संस्थानों में यह व्यवस्था पहले से लागू है. काम के भारी दबाव और कर्मियों की कमी के बावजूद सरकार उनकी जायज मांगों पर टालमटोल की नीति अपना रही है. इसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

मांगें नहीं मानीं तो लगातार पांच दिन प्रभावित रहेंगी सेवाएं

प्रदर्शनकारी बैंककर्मियों ने केंद्र सरकार और प्रबंधन को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो आगामी 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी.

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, 27 सितंबर को रविवार होने के कारण बैंक बंद रहेंगे. वहीं 26 सितंबर को चौथा शनिवार होने के कारण बैंकिंग सेवाएं बंद रहेंगी. इसके बाद यदि 28 से 30 सितंबर तक तीन दिनों की हड़ताल होती है, तो आम जनता को लगातार पांच दिनों तक बैंकिंग सेवाओं से वंचित रहना पड़ेगा.

नेताओं ने कहा कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रबंधन की होगी.

धरना-प्रदर्शन में ये रहे मौजूद

धरना-प्रदर्शन में वेदानंद शाह, शैलेश कुमार पाण्डेय, पवन कुमार मिश्रा, भोला पासवान, कैलाश पराशर, निखिल राकेश, राजेश कुमार राय, नीरज चौधरी, विशाल कुमार झा, मृणाल कुमार, भास्कर सिंह, सूरज कुमार, अमित कुमार, लक्ष्मी नारायण, इंद्र भूषण यादव, रविंद्र कुमार, अमरनाथ राव पाल, दिलीप कुमार मिश्रा, मिथिलेश कुमार, किशन कुमार, अमरनाथ मिश्रा, बृजेश कुमार, विकास आनंद गुप्ता, प्रकाश कुमार सहित अन्य उपस्थित थे.

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By Ashok kumar thak

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