छुआछूत की बीमारी नहीं है कुष्ठ

मधुबनी : चिकित्सकों के ज्ञान वर्द्धन के लिए राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत चिकित्सकों का तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन सदर अस्पताल के आइसीयू सभागार में मंगलवार को किया गया. कार्यशाला का उद्घाटन सिविल सर्जन डा. अमर नाथ झा ने किया. प्रशिक्षण में कुष्ठ रोगियों की पहचान के लिए विस्तृत जानकारी दिया गया. प्रशिक्षण […]

मधुबनी : चिकित्सकों के ज्ञान वर्द्धन के लिए राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत चिकित्सकों का तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन सदर अस्पताल के आइसीयू सभागार में मंगलवार को किया गया. कार्यशाला का उद्घाटन सिविल सर्जन डा. अमर नाथ झा ने किया. प्रशिक्षण में कुष्ठ रोगियों की पहचान के लिए विस्तृत जानकारी दिया गया.

प्रशिक्षण में बताया गया कि कुष्ठ छूत की बीमारी नहीं है. एमडीटी दवा का छह माह से 12 माह तक नियमित सेवन करने से कुष्ठ से पूर्णत: निजात पाया जा सकता है. प्रारंभिक दौड़ में बीमारी की पहचान कर इलाज करने से रोग के फैलने से को रोका जा सकता है.

729 रोगी कर रहे एमडीटी का सेवन
जनवरी माह में जिले में 729 कुष्ठ रोगियों द्वारा एमडीटी दवा का सेवन किया जा रहा है. इसके अलावा 772 ग्रेड 2 विकृति वाले कुष्ठ रोगी को बिहार शताब्दी कुष्ठ कल्याण योजना के तहत 1500 रुपये प्रतिमाह सामाजिक सुरक्षा कोषांग द्वारा पेंशन दिया जा रहा है. 1 अप्रैल 16 से जनवरी 17 तक जिले में 830 नये रोगियों की पहचान किया गया है. जिसमें 491 रोगी रोगमुक्त किये गये है. कार्यशाला में प्रशिक्षक के रूप में राज्य से आये डाॅ एके पांडेय, डीएफआइटी से केवीआर मूर्ति, एनके सिंह, जेम्स नाग शामिल रहे. इस अवसर पर उपस्थित जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी डा. सीके सिंह ने बताया कि जिले में कुष्ठ रोगियों में कमी दर्ज की जा रही है. कार्यशाला में विभिन्न प्रखंडों के चिकित्सा पदाधिकारी शामिल रहे.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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