प्रदेश की पहचान है िमथिला पेंटिंग

मधुबनी : मिथिला आर्ट इंस्टीच्यूट की बैठक प्रो. परमेश्वर झा की अध्यक्षता में हुई. जिसमें संस्था के छात्र-छात्राएं, शिक्षक एवं कार्यकारिणी के सदस्यों ने भाग लिया. इस दौरान बिहार सरकार के पीएचइडी विभाग के द्वारा राजधानी पटना में प्रकाशोत्सव पर्व के अवसर पर शौचालय व स्नानागार के दरवाजों पर धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक पेंटिंग का […]

मधुबनी : मिथिला आर्ट इंस्टीच्यूट की बैठक प्रो. परमेश्वर झा की अध्यक्षता में हुई. जिसमें संस्था के छात्र-छात्राएं, शिक्षक एवं कार्यकारिणी के सदस्यों ने भाग लिया. इस दौरान बिहार सरकार के पीएचइडी विभाग के द्वारा राजधानी पटना में प्रकाशोत्सव पर्व के अवसर पर शौचालय व स्नानागार के दरवाजों पर धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक पेंटिंग का विरोध करते हुए क्षोभ व्यक्त किया. सचिव डा. नरेंद्र नारायण सिंह निराला ने कहा कि अंशुली आर्या प्रधान सचिव पीएचडी के द्वारा एक दैनिक समाचार पत्र में वक्तव्य दिया था कि मिथिला पेंटिंग बिहार की पहचान है. पर उनके विभाग के द्वारा ही

शौचालय पर मिथिला पेंटिंग उत्कीर्ण कर धर्म और संस्कृति का अपमान किया जा रहा है. पूर्व डीआइजी चंद्रशेखर दास ने कहा कि इससे संपूर्ण मिथिलांचल अपमानित होता है. कलाकार डाॅ रानी झा ने कहा कि मिथिला चित्रकला अपनों के ही द्वारा उपेक्षित होने पर बेनूरी पर आंसू बहाएगी. दुलारी देवी ने कहा कि मिथिला की सांस्कृतिक लोकचित्र कला की इससे अधिक दुर्दशा की कल्पना नहीं की जा सकती है. बैठक में सुखदेव राम, शिखा कुमारी, पम्मी कुमारी, विभा झा आदी ने इसकी कड़ी भर्त्सना की.

धन्यवाद ज्ञापन कौशिक कुमार झा की. वहीं सामाजिक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्थाओं की ओर से प्रो. जेपी सिंह, उदय जायसवाल, भोलानंद झा सहित अन्य ने ऐसे कृत्यों पर अपना विरोध दर्ज किया है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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