13वां श्याम वार्षिक महोत्सव
भागवत कथा अमृत को देता अमरत्व
दरभंगा : संस्कृत एवं संस्कृति इस देश की धरोहर है. इसे भूलकर हम सभी विनाश की ओर अग्रसर हो रहे हैं. बिहार एवं उत्तर प्रदेश के लोग अभी भी उस संस्कृति का निर्वहण कर रहे हैं. संस्कृत व संस्कृति को नहीं भूलनेवाले सदैव गौरवान्वित होते रहेंगे. 13वें श्याम वार्षिक महोत्सव के अवसर पर श्याम उत्सव परिवार की ओर से संस्कृत विश्वविद्यालय खेल मैदान में प्रारंभ हुए श्रीमद् भागवत कथा उत्सव के पहले दिन कथा व्यास पंडित देवकी नंदन ठाकुर ने उक्त बातें कहीं.
कथा व्यास ने श्रीमद् भागवत के प्रथम श्लोक – सच्चिदानंद रूपाय…. की व्याख्या करते हुए बताया कि साधक वहीं है जो सत्यभाषी हो और चित्त जिसके वश में हो. इसी दौरान वर्षा शुरू होने पर उन्होंने बताया कि भागवत कथा शुरू होने पर सभी देवता वहां वास करते हैं. इंद्र भगवान अपनी उपस्थिति का अहसास करा रहे हैं. कथा व्यास ने बताया कि भगवान के मंदिर या कथा पंडाल में कभी भी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए. कम से कम एक फूल जरूर ले लें, क्योंकि भागवत कथा अमृत को अमरत्व प्रदान करता है. उन्होंने आयोजन के िलए श्याम उत्सव परिवार को धन्यवाद दिया.
श्याम बाबा मंदिर से निकली कलश यात्रा
आज सुबह आठ बजे सैंकड़ों श्याम भक्तों ने बड़े वाहन पर श्याम बाबा की झांकी को सजाकर कलश शोभा यात्रा निकाली. शोभा यात्रा मशरफ बाजार, दरभंगा टावर, हसनचक, राज स्कूल होते हुए कथा स्थल तक पहुंचा. रास्तेभर श्याम भक्त जयकारे लगा रहे थे.
