शहर में जिसका जहां मन हो रहा है स्पीड ब्रेकर बना ले रहे हैं. प्राय: हर मुहल्ला की सड़कों पर स्थायी रूप से ब्रेकर बना हुआ है. अब तो लोग ईट-मिट्टी डालकर भी अपने घर के सामने ब्रेकर बना रहे हैं. यह एक गंभीर समस्या है. इससे जहां हमारे सेहत पर बुरा असर पड़ता है. वहीं दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.
मधुबनी : शहर में स्पीड ब्रेकर लोगों की सेहत बिगड़ रही है. उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी शहर में बन रहे सड़कों पर ब्रेकर आम बात हो गयी . अमूमन देखा जाए तो शहर में हर एक गली एवं मुहल्लों के सड़कों पर दो चार ब्रेकर बना हुआ है.
दरहसल उच्च न्यायालय ने शहर में सड़कों पर स्पीड ब्रेकर को हटाने का निर्णय दिया था. शहर में प्राय: प्रत्येक सड़कों पर स्पीड ब्रेकर आपके वाहनों के रफ्तार को धीरे करते मिल जायेंगे. शहर में यत्र तत्र सड़कों पर स्पीड ब्रेकर रहने से इसका असर स्वस्थ पर प्रतिकूल पड़ता है.
खासकर बाइक पर पीछे बैठे सवारों की स्पीड ब्रेकर का शिकार होना पड़ता है. प्रभात खबर ने जब शहर में ब्रेकर की जानकारी जुटानी शुरू की तो इसकी संख्या सैकड़ों में पहुंच गयी. औसतन हरेक 50 फीट पर एक ब्रेकर आपको जरूर मिल जाएंगे.
अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक सड़कों से गुजरते है. पर कोई भी इस संबंध में जानकारी लेने की तकलीफ नहीं उठाते.
ब्रेकर के लिए सिर्फ निर्माण एजेंसी ही नहीं उससे अधिक हम आप जिम्मेवार है. जब गली मुहल्लों में सड़के बनने लगती है तो हम आप एजेंसी पर दवाब डालकर अपने अपने घर के सामने ब्रेकर बनवाते है.
संवेदक पर बनाया जाता है दबाव
ब्रेकर का निर्माण जिला प्रशासन या विभाग के द्वारा नहीं कराया जाता है. बल्कि इसके लिए स्थानीय लोग ही अधिकांश मामलों में जिम्मेवार होते हैं. जिस कॉलोनी में जहां सड़कों का निर्माण होता है प्राय: सभी अपने घर के आस पास सड़कों पर ब्रेकर बनाने के लिए संवेदक पर दबाब बनाते हैं. ना नहीं छापने के शर्त पर एक संवेदक ने बताया कि प्राकल्ण मुताबिक सड़कों का निमार्ण होता है. प्राकल्णों में ब्रेकर का कही जिक्र नहीं रहता वहां के स्थानीय लोग दबाब बनाकर निर्माण करवाते हैं. इसके निर्माण में खर्चा में बढ़ जाती है.
