हरलाखी में गरमाने लगा राजनीतिक तापमान

चौक-चौराहों पर हो रहीं उपचुनाव की चर्चाएं गत चुनाव की अपेक्षा आधी पर अटकी प्रत्याशियों की संख्या बेनीपट्टी : अनुमंडल के हरलाखी विधानसभा क्षेत्र में 13 फरवरी को होने वाला उपचुनाव को लेकर क्षेत्र में चुनावी चर्चाओं का बाजार गरमाने लगा है. नाम वापसी की तिथि समाप्त होते ही विभिन्न चौक चौराहों पर राजनीतिक सरगरमी […]

चौक-चौराहों पर हो रहीं उपचुनाव की चर्चाएं

गत चुनाव की अपेक्षा आधी पर अटकी प्रत्याशियों की संख्या
बेनीपट्टी : अनुमंडल के हरलाखी विधानसभा क्षेत्र में 13 फरवरी को होने वाला उपचुनाव को लेकर क्षेत्र में चुनावी चर्चाओं का बाजार गरमाने लगा है. नाम वापसी की तिथि समाप्त होते ही विभिन्न चौक चौराहों पर राजनीतिक सरगरमी अब तेज होने लगी है. पुलिस प्रशासन के द्वारा लगातार चलाये जा रहे वाहन तलाशी अभियान व प्रत्याशियों के द्वारा अपने समर्थकों के साथ चलाये जा रहे जनसंपर्क अभियान से भी क्षेत्र में चुनावी माहौल गरमाने लगा है.
विगत चुनाव में 18 प्रत्याशी थे मैदान में
बता दें कि गत नवंबर में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में हरलाखी विधानसभा से कुल 18 प्रत्याशियों ने अपना भाग्य अजमाया था. इसमें कई दिग्गजों का नाम भी शामिल है. इससे चुनाव आयोग को भी दो इवीएम प्रयोग करने पड़े थे, लेकिन अगले माह होने वाले इस उपचुनाव में प्रत्याशियों की संख्या पहले की अपेक्षा आधी हो जाने से स्थानीय लोगों के द्वारा मुकाबला रोचक होने के कयास लगाये जा रहे हैं.
पिछले बार जहां दो पूर्व विधायक क्रमश: रामाशीष यादव (निर्दलीय) व सीपीआइ से रामनरेश पांडेय के साथ अपनी पार्टी त्यागकर समाजवादी पार्टी के टिकट पर जदयू के निवर्तमान विधायक शालिग्राम यादव ने भी चुनावी मैदान में कूदकर अपनी किस्मत आजमाइ थी, लेकिन एनडीए गंठबंधन के रालोसपा प्रत्याशी वंसत कुशवाहा ने इन तीनों दिग्गजों को धूल चटाने के साथ महागंठबंधन के कांग्रेस प्रत्याशी मो शब्बीर को करीब चार हजार मतों से हराकर बाजी मारने में सफलता हासिल की थी.
हालांकि शपथ ग्रहण से चंद घंटे पूर्व अचानक वसंत कुशवाहा के निधन हो जाने से हरलाखी विधानसभा की सीट खाली हो गयी थी. इसके फलस्वरूप चुनाव आयोग को एकबारगी फिर से चुनाव करानी पड़ रही है. इस बार प्रत्याशियों की संख्या नौ है. जिस कारण न केवल चुनाव परिणाम के लिए मतों का ग्राफ बढ़ जाने से इनकार नहीं किया जा सकता है,
बल्कि राजद से बगावत कर बतौर स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में इस बार रामाशीष यादव के चुनाव मैदान में नहीं उतरने से दोनों गंठबंधनों के साथ-साथ वाम मोर्चा के प्रत्याशी रामनरेश पांडेय के बीच रोमांचक मुकाबला होने की संभावना भी प्रबल होने लगी है. हो सकता है कि इस चुनाव में मतों की आंकड़ों को पप्पू यादव की जनाधिकार पार्टी से पहली बार अपनी किस्मत आजमा रही फुलहर पंचायत की मुखिया अनीता देवी भी प्रभावित कर सकती हैं.
शब्बीर को मिली थी चार हजार मतों से मात
गत चुनाव में वसंत कुशवाहा करीब 40 हजार मत पाकर चुनाव जीतने में कामयाबी पायी थी. वहीं, कांगेस प्रत्याशी मो शब्बीर करीब 36 हजार मत पाकर दूसरे, सीपीआइ के रामनरेश पांडेय 22 हजार से अधिक मत लाकर तीसरे और राजद के बागी व स्वतंत्र प्रत्याशी रामाशीष यादव 21 हजार से अधिक मतों के साथ चौथे स्थान पर रहे थे.

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