सीवरेज के तहत इसके लिए भी चयनित एजेंसी से नहीं हो सका करार
मधुबनी : शहर में जलापूर्ति योजना पर ग्रहण लगा हुआ है. शहर में रहने वाले करीब एक लाख लोखों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो रहा है. 30 वार्डों वाले नगर परिषद में भले ही 375 चापाकल के सहारे जलापूर्ति की जा रही है, लेकिन लोगों को घरों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है.
दरअसल, शहर में केंद्र सरकार के जेनुरूम योजना के तहत होने वाले जलापूर्ति योजना को तत्काल रोक दिया गया है. बताया जाता है कि इसका कारण चयनित एजेंसी से करार नहीं होना है. आबादी के अनुसार जलापूर्ति नहीं होने के कारण चापाकल पर लोगों की लंबी कतार लगी रहती है. विभागीय आंकड़ा पर गौर किया जाये तो शहर में लगे चापाकल में से 25 प्रतिशत चापाकल हमेशा खराब
रहती है.
बुडको ने निकाली थी निविदा
जलापूर्ति योजना का कार्य केंद्रीय योजना से होना था. केंद्र से इसके लिए बिहार के छह जिलों का चयन किया गया था. स्थानीय नगर प्रशासन ने डीपीआर बनाकर नगर एवं आवास विभाग को भेज दिया गया था. केंद्र ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर मधुबनी शहर में इन कार्यों के लिए 44 करोड़ निर्धारित किये. इसके बाद बिहार अरवन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (बुडको) ने शहर में स्टेट पोस्ट बनाकर पाइप लाइन लगाने के लिए निविदा जारी की थी. बताया जाता है कि निविदा में सिर्फ एक एजेंसी ही भाग लिया. इसके कारण इसे रद्द कर दिया गया. सूत्रों का कहना है कि केंद्र के मंजूरी मिलने के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू हुई थी.
नप ने भेजा डीपीआर
नगर परिषद ने जलापूर्ति योजना के लिए अक्तूबर 2014 से पहले डीपीआर तैयार कर भेजा था. इसमें शहर में स्टेंड पोस्ट व पाइप लगाने के लिए भूमि चिह्नित कर दी गयी थी. इसके लिए शहर में अनंत लाल चौक से पूरब, आरके कॉलेज गेट से दक्षिण, स्टेडियम के उत्तर पूरब, संतू नगर चौक से पश्चिम, वार्ड नंबर 22 में मंगल पोखर से उत्तर एवं भौआड़ा में कदम चौक से उत्तर जमीन चिह्नित किया गया था.
पेयजल एक बड़ी समस्या
शहर में पेयजल एक बड़ी समस्या रही है. जलापूर्ति योजना से शहर वासियों को शुद्ध पेयजल मिलने की उम्मीद थी. वहीं अन्य कार्यों में भी सहूलियत होती. प्राय: प्रत्येक लोगों के लिए पानी की आवश्यकता होती है. इसके बिना हम जमीन की कल्पना भी नहीं कर सकते. शहर की करीब एक लाख आबादी पर 375 चापाकल हैं. इसके कारण खासकर गरीबों को काफी परेशानी होती है. गौरतलब है कि करीब बीस साल पहले शहर में पाइप लाइन द्वारा जलापूर्ति की जाती थी. अब इसका नामों निशान मिट चुका है.
देना पड़ रहा टैक्स
ऐसा नहीं कि शहर के लोगों को घरों में जलापूर्ति योजना नहीं हो रही है तो टैक्स में भी छूट हो रही होगी. सालाना कुल टैक्स का 15 फीसदी टैक्स जलापूर्ति मद में लिया जाता है.
इस बातों पर शहर के अधिकांश लोग गौर नहीं कर रहे. इस कारण नप को कभी भी टैक्स के मामले में जलापूर्ति मद की टैक्स का कटौती लोग
नहीं करते.
