Madhubani News : शहर में समस्तीपुर से हो रही 70 फीसदी सब्जी की आपूर्ति

यदि खाने के थाली में हरी सब्जी नहीं मिले तो खाने का जायका ही बदल जाएगा.

मधुबनी.

यदि खाने के थाली में हरी सब्जी नहीं मिले तो खाने का जायका ही बदल जाएगा. कीमत अधिक रहने पर लोग सब्जी भले ही कम खरीद रहे हों, लेकिन इसके बिना लोग खाना नहीं खाते हैं. सीजनल सब्जी का लोग भोजन के साथ आनंद लेते हैं. शहर में करीब एक लाख की आबादी को कच्ची सब्जी की आपूर्ति जिले के ग्रामीण क्षेत्र व अन्य जिलों से होती है. शहर में 70 फीसदी सब्जी की आपूर्ति समस्तीपुर जिले से होती है. वर्तमान में करीब 50 क्विंटल गोभी समस्तीपुर से रोजाना खपत होती है, जबकि लोकल गोभी इससे आधी बिकती है. गृहिणी छाया कुमारी, उषा कुमारी, रमा देवी ने कहा कि यहां की सब्जी में वो स्वाद नहीं मिलता जो अपने यहां के सब्जियों में होती है. बिचौलिया के कारण सब्जी के भाव चढ़े रहते हैं.

समस्तीपुर की सब्जी सस्ती :

वर्तमान समय में समस्तीपुर की गोभी 16 रुपये प्रति किलो मिल रहा है . वहीं अपने जिले के ग्रामीण क्षेत्र से आयी गोभी 20 से 25 रुपये प्रति किलो मिल रही है. स्थानीय किसान रामदेव महतो व अजित कुमार सिंह ने कहा कि अपने एरिया के सब्जी अच्छी होती है. समय पर इसका उत्पादन कम होता है. लोग खाद का उपयोग भी कम करते हैं. थोक विक्रेता अशोक साह ने कहा कि समस्तीपुर जिले के मुक्तापुर, ताजपुर, पूसा व समस्तीपुर से सब्जी की आपूर्ति होती है. यहां का रेट भी कम रहता है मांग के अनुरूप आपूर्ति भी हो जाती है. यहां थोड़ी लेट उपज होती है. बैगन व टमाटर की उपज पर कीट का प्रभाव पड़ा है. जिसके कारण आपूर्ति नहीं हो पाती है. इससे इसके भाव में तेजी बनी हुई है. पिछले साल की अपेक्षा 25 से 30 रुपये भाव चढ़े हैं. ये 50 से 60 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं.

बारिश के कारण जिले में सब्जी की खेती में विलंब :

इस वर्ष लगातार बारिश के कारण अक्टूबर माह में खेत में लगायी जाने वाली हरी सब्जियां नवंबर से लगायी गयी. हरी सब्जियों की बुआई में करीब एक माह विलंब होने से स्थानीय स्तर पर होने वाली सब्जियां थोड़ी विलंब से बाजार में उपलब्ध हो पाया. एक से तीन माह में तैयार होने वाले सब्जियों में फूलगोभी, पत्तागोभी, टमाटर, प्याज, मटर, बैगन, विम्स, चुकंदर, सरसों साग, पालक, हरी मिर्च, मूली सहित अन्य शामिल है. स्थानीय स्तर पर से उपजने वाले हरी सब्जियां बाजार में आने तक बाजार में अन्य जिला व प्रदेशों के सब्जियों के मूल्य में बढ़ोतरी रहने की आशंका रहती है . वर्तमान में स्थानीय सब्जी मंडी में बिकने वाली अधिकांश सब्जियां समस्तीपुर व बंगाल से आपूर्ति हो रही है. बता दें कि वर्ष अक्टूबर तक लगातार बारिश के कारण सब्जियों के फसल नष्ट हो जाने से बाजार में अन्य जिलों से सब्जी की आपूर्ति हो रही है . जिससे इसकी दरों में उछाल रहती है. विक्रेता अशोक साह बतातें है कि सीजनल सब्जी अधिकांश समस्तीपुर जिले से आती है, जबकि अनसीजनल सब्जी बंगाल से आपूर्ति होती है.

खेत से लेकर सब्जी मंडी तक बिचौलियों का दबदबाहरी सब्जियों के कारोबार में खेत से लेकर सब्जी मंडी तक बिचौलियों का दबदबा बना है . जिला मुख्यालय स्थित सब्जी के थोक विक्रेता जिले के किसानों के खेतों से कम दाम पर सब्जियां खरीद कर उसे ऊंचे दरों पर मंडी के सब्जी के खुदरा विक्रेताओं के हाथों बेचते हैं. लेकिन इस वर्ष जिले में सब्जी की फसल को 90 प्रतिशत फसल नुकसान होने से यहां के सब्जी के थोक विक्रेता समस्तीपुर, झारखंड व बंगाल से सब्जियां मंगा रहे हैं. इन सब्जियों पर दस से 15 प्रतिशत का मुनाफा लेकर खुदरा विक्रेताओं के हाथों बेच देते हैं .जबकि खुदरा विक्रेता दस से 15 प्रतिशत मुनाफा लेकर उपभोक्ताओं से सब्जी की बिक्री करते है. सब्जी बिचौलियों पर विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होने से जिले के सब्जी किसानों या फिर बाहर लाए गए सब्जियां मनमाने दर बिक्री करते हैं .

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Author: GAJENDRA KUMAR

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