लक्ष्य 48 हजार, उपलब्धि 4518

मधुबनी : जिले में परिवार नियोजन ऑपरेशन की गति धीमी होने से जनसंख्या विस्फोट की आशंका गहराती जा रही है. अगर उदासीनता का यही आलम रहा तो जिले की आबादी जल्द ही 50 लाख के आंकड़े को छू लेगी. बढ़ती आबादी जिले के लिए समस्या बनती जा रही है. समस्या के निदान के लिए सरकार […]

मधुबनी : जिले में परिवार नियोजन ऑपरेशन की गति धीमी होने से जनसंख्या विस्फोट की आशंका गहराती जा रही है. अगर उदासीनता का यही आलम रहा तो जिले की आबादी जल्द ही 50 लाख के आंकड़े को छू लेगी. बढ़ती आबादी जिले के लिए समस्या बनती जा रही है.

समस्या के निदान के लिए सरकार ने पुरुष नसबंदी की प्रोत्साहन राशि 1100 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये कर दी. फिर भी परिणाम असंतोषजनक है. अभी भी महिलाओं के कारण ही परिवार नियोजन ऑपरेशन को उपलब्धि हासिल हो रही है. जबकि महिलाओं को बंध्याकरण के लिए सिर्फ 1400 रुपये मिल रहे हैं. सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में महिलाओं ने पुरुषों को मात दी है. इस योजना में उपलब्धि को देखकर ही इसमें लोगों की जागरूकता और विभाग की पहल की सच्चाई का स्वत: ही अंदाजा लगाया जा सकता है.

लक्ष्य से कोसों दूर है उपलब्धि

जिले में परिवार नियोजन योजना लक्ष्य से कोसों दूर है. जो स्थिति है उससे यह संभावना बन गयी है कि चालू वित्तीय वर्ष का लक्ष्य किसी भी सूरत में हासिल नहीं हो सकेगी. 48 हजार लोगों का परिवार नियोजन कराने का लक्ष्य है. आठ माह में सिर्फ 4518 परिवार कल्याण ऑपरेशन हुए हैं. उपलब्धि सिर्फ 9.47 प्रतिशत है. इस वित्तीय वर्ष के समाप्त होने में मात्र चार माह बचे हैं. अब सिर्फ चार माह में लक्ष्य को हासिल करना संदिग्ध नजर आ रहा है.
लगाये जा रहे हैं कैंप
लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिले में नियमित रूप से परिवार नियोजन ऑपरेशन कैंप लगाये जा रहे हैं, लेकिन विभाग के कैंप में भी लक्ष्य के अनुकूल लोग नहीं पहुंच रहे हैं. विभाग को उम्मीद है कि जाड़े के मौसम में दिसंबर व जनवरी माह में इसमें तेजी आयेगी. पर यह आने वाला समय ही बतायेगा कि विभाग के दावे में कितना दम है.
जागरुकता का अभाव
परिवार नियोजन ऑपरेशन को अपेक्षित गति नहीं मिलने का प्रमुख कारण जागरूकता का अभाव है. लोगों में पुरुष नसबंदी को लेकर काफी भ्रांतियां हैं. उनमें यह डरा समा गया है कि पुरुष नसबंदी के कारण उनमें नपुंसकता आ सकती है. जबकि यह गलत भ्रांति है. परिणाम यह है कि जिले में जो भी परिवार नियोजन ऑपरेशन होता है उसका 98 प्रतिशत श्रेय महिलाओं को जाता है. पुरुष नसबंदी लक्ष्य की तुलना में नगण्य होता है. जागरूकता के अभाव के साथ साथ प्रचार-प्रसार की कमी भी लक्ष्य को प्रभावित कर रही है. सर्जन का अभाव, पीएचसी में ऑपरेशन कराने गये मरीजों के लिए सुविधाओं का अभाव भी इस योजना की सफलता में बाधक बन रही है.
नतीजा खास नहीं
परिवार नियोजन ऑपरेशन के लिए महिलाओं को 1400 रुपये मिलने का प्रावधान है. जो भी उत्प्रेरक महिला को परिवार नियोजन ऑपरेशन के लिए लायेगा उसे भी 200 रुपये दिये जायेंगे. इस तरह प्रति महिला बंध्याकरण में 1600 रुपये सरकार के खर्च होते हैं.
वहीं, परिवार नियोजन कराने वाले पुरुषों को महिलाओं की तुलना में अधिक राशि मिलने लगी है. अब पुरुषों को प्रति नसबंदी 2000 रुपये मिलते हैं. उन्हें ऑपरेशन के लिए लाने वाले उत्प्रेरक को 300 रुपये दिये जाते हैं. प्रति पुरुष नसबंदी सरकार को 2300 रुपये व्यय करने होते हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
सिविल सर्जन डाॅ नरेंद्र भूषण का कहना है कि सभी उपाधीक्षक व पीएचसी प्रभारी को परिवार नियोजन ऑपरेशन का लक्ष्य शत प्रतिशत प्राप्त करने का आदेश जारी कर दिया गया है. जो भी इस आदेश का उल्लंघन करेंगे उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जायेगी.

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