मधुबनी : एक बार फिर मिथिलांचल में शुभ मुहूर्त आ गया है. शहर से लेकर गांव कस्बों तक में शहनाई की धुन गूंजने लगी है. लोग अपनी पुत्री, बहन, के लिये योग्य वर की तलाश में गांव गांव घूम रहे हैं. अपने परिचितों से योग्य वर के संबंध में जानकारी इकठ्ठा करने की कोशिश हर […]
मधुबनी : एक बार फिर मिथिलांचल में शुभ मुहूर्त आ गया है. शहर से लेकर गांव कस्बों तक में शहनाई की धुन गूंजने लगी है. लोग अपनी पुत्री, बहन, के लिये योग्य वर की तलाश में गांव गांव घूम रहे हैं. अपने परिचितों से योग्य वर के संबंध में जानकारी इकठ्ठा करने की कोशिश हर ओर हो रही है.
ऐसे में बाजारों में चहल पहल बढ़ना भी लाजिमी है. लग्न का समय आते ही बाजारों में शादी, जनेउ व मंंडन संस्कार से संबंधित सामान की दुकानें भी सज गयी है. इसकी खरीदारी करने में भी लोग जुट गये हैं. शायद ही कोई ऐसा गांव है जहां पर शादी विवाह या फिर जनेउ संस्कार या मुंडन संस्कार की बातें न हो रही हो. बराती के दरवाजे पर आने की बात हो और महिलाएं इनके स्वागत की तैयारी में न रहे यह असंभव है.
पंडितों की कमी
एक ओर जहां हर गांव में शुभ लग्न की धूम मची है, वहीं दूसरी ओर इस काम के लिए सबसे अहम पंडितों की कमी सामने आ रही है. इसका सबसे अहम कारण संस्कृत भाषा के जानकारों की कमी बतायी जा रही है. गांव-गांव घूमने के बाद ही गिने चुने योग्य पंडित मिल रहे हैं. हर कोई योग्य पंडित से ही मुंडन, विवाह, जनेउ संस्कार
यज्ञ संपन्न कराना चाहता है. पर पंडितों की कमी से लोगों को परेशानी हो रही है.
सोने-चांदी की बढ़ी बिक्री
लग्न का समय आते ही बाजारों में सोने चांदी की मांग सबसे अधिक बढ़ जाती है. हर साल की तरह इस साल भी लग्न की शुरुआत होते ही सर्राफा बाजार में खरीदारों की भीड़ बढ़ती जा रही है. लोग समय रहते हर सामान की खरीद कर काम संपन्न करने की कोशिश में जुटे हैं.