मधुबनी : आप मानें या न मानें पर यह सच है कि सदर अस्पताल बिना आईसीयू के चल रहा है. आईसीयू के नाम पर सिर्फ इसीजी हो रहा है. सात साल पूर्व सदर अस्पताल में आईसीयू की स्थापना हुई थी, पर स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण इसने दम तोड़ दिया. सात साल में उपलब्धि […]
मधुबनी : आप मानें या न मानें पर यह सच है कि सदर अस्पताल बिना आईसीयू के चल रहा है. आईसीयू के नाम पर सिर्फ इसीजी हो रहा है. सात साल पूर्व सदर अस्पताल में आईसीयू की स्थापना हुई थी, पर स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण इसने दम तोड़ दिया.
सात साल में उपलब्धि यह है कि इसमें मरीजों को महज इसीजी ही हो रहा है.इसके साथ ही वर्न यूनिट, स्वास्थ्य कर्मियों के रहने का आवास नहीं बना है. हर विभाग में कमी सामने आ रही है.
नहीं मिल रहा लाभ
सदर अस्पताल के आईसीयू भवन में कार्डियक मॉनीटर का लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा है. वेंटिलेटर के लाभ से भी वे वंचित हैं. जबकि कार्डियक मॉनीटर व वेंटिलेटर आईसीयू को उपलब्ध कराया गया था.
गंभीर रूप से बीमार मरीजों पर आफत आ गई है. आईसीयू के मरीजों का इलाज सदर अस्पताल के इमर्जेंसी कक्ष में हो रहा है. जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों व दवाओं का घोर अभाव है.
नहीं शुरू हो सका एसएनसीयू
सदर अस्पताल में करोड़ों की लागत वाला स्पेशल न्यू बॉर्न केयर युनिट का भवन बनने के बाद से ही बंद है. यह काफी आधुनिक ढंग से सुसज्जित भवन अंदर में बना है. यहां नवजात व शिशुओं की अत्याधुनिक चिकित्सा व्यवस्था का प्रावधान है. एसएनसीयू के बंद भवन का दरवाजा खुलने का नाम नहीं ले रहा है. स्वास्थ्य प्रशासन की विफलता का जीता जागता नमूना है एसएनसीयू.
नहीं बन सका डॉक्टरों का आवास
एक करोड़ 75 लाख की लागत से डॉक्टरों के लिये आवास बनने का काम शुरू हुआ पर कुछ ही दिनों के बाद निर्माण कार्य अधर में लटक गया. इसी तरह 1 करोड़ 25 लाख रुपयों की लागत से एएनएम का आवास बनना शुरू हुआ पर यह भी अचानक बंद हो गया.
कई साल से जमे हैं स्वास्थ्यकर्मी
सदर अस्पताल में पिछले कई सालों से स्वास्थ्यकर्मी एक ही जगह पर जमे हुये हैं. प्रतिनियुक्ति कराकर कुछ दिनों के लिये दूसरे जगह चले जाते हैं फिर गणेश परिक्रमा कर वापस सदर अस्पताल चले आते हैं. यह सिलसिला पूर्व से ही जारी है. प्रतिनियोजन का कमाल देखना हो तो आइये सदर अस्पताल.
नहीं है महिला लिपिक
सदर अस्पताल परिसर में एएनएम स्कूल में महिला लिपिक नहीं है. जबकि लेप्रोसी कार्यालय में दो महिला लिपिक है. समाजसेवियों ने सिविल सर्जन से मांग की है कि एएनएम स्कूल में महिला लिपिक की पदस्थापना की जाय.