टूट गयी दीवारें, जर्जर हो गयी छत

टूट गयी दीवारें, जर्जर हो गयी छतलापरवाही. स्टेडियम में खेलने का सपना नहीं ले सका हकीकत का रूप-मैदान बना शौचालय व पशुओं का चारागाह-28 साल पहले किया गया था निर्माण-कई गणतंत्र दिवस समारोह में मंत्री कर चुके हैं जिले के विकास की बात, पर स्टेडियम को आज भी उद्धारक की तलाश फोटो: 6,7परिचय: मधुबनी स्टेडियम […]

टूट गयी दीवारें, जर्जर हो गयी छतलापरवाही. स्टेडियम में खेलने का सपना नहीं ले सका हकीकत का रूप-मैदान बना शौचालय व पशुओं का चारागाह-28 साल पहले किया गया था निर्माण-कई गणतंत्र दिवस समारोह में मंत्री कर चुके हैं जिले के विकास की बात, पर स्टेडियम को आज भी उद्धारक की तलाश फोटो: 6,7परिचय: मधुबनी स्टेडियम प्रतिनिधि, मधुबनी विगत 28 साल पहले जिला मुख्यालय में बना स्टेडियम आज अपने बदहाली पर रो रहा है. यह इस जिले के लोग खास कर युवा वर्ग के लिए दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि उनके खेल की प्रतिभा को निखारने के लिए बनाये गये स्टेडियम में आज तक खेल का आयोजन नहीं हो सका. इसका सबसे बड़ा कारण स्टेडियम के इस लायक नहीं रहना है. सालों भर पानी का जमाव आवारा पशुओं का चारागाह बन चुका है यह स्टेडियम. 1984 में रखी गयी थी आधारशिला जिले में एक भी स्टेडियम नहीं रहने की कमी को देखते हुए जिला मुख्यालय में ही एक स्टेडियम का निर्माण किये जाने की स्वीकृति दी गयी. इसके निर्माण की आधारशिला चार मार्च 1984 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रशेखर सिंह ने रखी थी. जोर शोर से इसका निर्माण किया गया. तीन साल के बाद स्टेडियम बन कर तैयार भी हो गया. इसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री विंदेश्वरी दूबे ने 1987 में किया. स्टेडियम बन कर तैयार हो गया तो लोगों में उत्साह जगी कि अब इसमें खेल का आयोजन भी होगा, लेकिन इस उम्मीद में कई युवा उम्र के चौथे पड़ाव में में पहुंच गये पर इस स्टेडियम में खेलने का उनका सपना आज तक पूरा नहीं हो सका. खंडहर में हुआ तब्दील देखरेख की कमी व प्रशासन की लापरवाही के कारण स्टेडियम अब जीर्णशीर्ण व खंडहर में तब्दील हो चुका है. दर्जनाें जगह से दीवार इस कदर टूट गयी है कि इससे होकर अब आवारा पशु भी आराम से आते जाते हैं. कई बार इस मामले को लेकर सामाजिक संगठनों ने प्रशासनिक अधिकारियों को दीवार को ठीक करने व स्टेडियम को सही करने की मांग की, लेकिन मंशा ठीक हो तो पहल हो. अब तो लोग कहना भी छोड़ चुके हैं. स्टेडियम के मुख्य प्रवेश द्वार, कहने को बनाया गया ड्रेसिंग रूम , छत सब जर्जर है. सालों भर रहता है जलजमाव इस स्टेडियम की न सिर्फ दीवारें ही टूटी हुई हैं. बल्कि मैदान में सालों भर पानी व गंदगी फैली रहती है. एक चापाकल तक यहां पर नहीं लगाया जा सका है. जब कभी जिला स्तर पर कोई छोटी बड़ी कार्यक्रम में इस स्टेडियम का उपयोग किया जाता है तो अस्थायी तौर पर एक दो चापाकल लगा कर काम किया जाता है. सबसे बड़ी बिडंबना तो यह है कि हर 26 जनवरी के अवसर पर मुख्य समारोह इसी स्टेडियम के प्राचीर से होता है. इसमें प्रभारी मंत्री या अन्य कोई मंत्री, विधायक, जिला अधिकारी से लेकर तमाम अधिकारी शामिल होते है. जहां से जिले में विकास की सैकड़ों बड़ी-बड़ी बातें की जाती है. इसके बाद भी आज तक इस स्टेडियम के विकास के दिशा में किसी ने न तो पहल की और न ही इस ओर ध्यान दिया. आलम यह है कि यह दिन व दिन अपनी अस्तित्व को खोता जा रहा है. हर साल होता हजारों खर्च हां, इस स्टेडियम में जब कभी किसी कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. उसके नाम पर हजारों रुपये का बिल जरूर बन जाता है. 26 जनवरी में परेड की बात हो या फिर चुनाव में वाहनों के जमा करने की बात हो या फिर कभी कभी अन्य कार्यक्रम की बात. हर कार्यक्रम से पहले मिट्टी भराई के नाम पर हजारों रुपये खर्च किये जाते हैं. इन दिनों विधानसभा चुनाव में चुनाव कार्य के लिए जमा किये जा रहे वाहन के रखने के लिए इसे फिर उपयुक्त जगह माना जा रहा है, लेकिन जलजमाव होने के कारण विगत कई दिनों से इस मैदान से दमकल के माध्यम से पानी निकासी की जा रही है. क्या कहते हैं अधिकारी एसडीओ मो शाहिद परवेज बताते हैं कि जल्द ही स्टेडियम का नये सिरे से पूर्ण मरम्मत का काम शुरू किया जायेगा. फिलहाल चुनाव के कारण इस मामले में कोई भी काम नहीं हो सकेगा.

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