कलुआही : अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित कलुआही प्रखंड साक्षरता समन्वयक के अवैध नियोजन का मामला शिक्षा विभाग की लापरवाही से करीब नौ माह से लंबित है. 30 जुलाई 2011 को प्रमुख ने स्वीकृत आरक्षण रोस्टर के विरुद्ध पिछड़ा वर्ग का बहाली कर दिया था.
अंतत: डीपीओ साक्षरता ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा किया है. विभागीय स्तर पर आरक्षण रोस्टर के प्रतिकुल बहाली को गलत मानते हुए तत्कालीन बीइओ सहित अन्य के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की बात बतायी जा रही है.
क्या है मामला
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी साक्षरता ने 27 सितंबर 2014 को बीइओ से प्रखंड कार्यक्रम समन्वयक के चयन में रोस्टर का अनुपालन किया गया है या नहीं का प्रमाण पत्र समर्पित करने को कहा. कलुआही में उक्त पद अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित है. प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने 17 सितंबर 2014 को डीपीओ साक्षरता एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र लिख कर सूचित किया है कि अत्यंत पिछड़ा वर्ग की जगह पिछड़ा को मोहन जी यादव कार्यरत है.
आनन-फानन में बहाली
30 जुलाई 2011 को एक ही दिन में चयन समिति की दो अलग-अलग बैठक आयोजित कर आनन-फानन में तीन अभ्यर्थी में से एक का स्वीकृत आरक्षण रोस्टर के विरुद्ध चयन कर दिया. सबसे दिलचस्प बात यह कि उक्त बैठक में तत्कालीन बीइओ ने 29 जुलाई 2011 की तिथि में हस्ताक्षर किया है. जो अपने आप में बड़ा सवाल है.
प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग
पंचायत समिति सदस्य संतोष भगत ने जिला कार्यक्रम पदाधिकारी साक्षरता को पत्र लिखकर प्रमुख पर निहित स्वार्थ के लिए पद की गरिमा का दुरुपयोग करते हुए स्वजातीय व्यक्ति को गलत तरीके से सरकारी लाभ पहुंचान जैसा संगीन अपराध करने का आरोप लगाया है. संतोष भगत ने इस मामले में संलिप्त सभी दोषियों के विरुद्ध भादवि की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग किया है.
क्या कहते हैं अधिकारी
जिला शिक्षा पदाधिकारी एसएन चौधरी ने कहा है कि डीपीओ से संचिका मांगी गयी है. अतिपिछड़ा वर्ग के पद पर अन्य की बहाली प्रमाणित होने पर दोषियों को चिह्न्ति कर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी.
