हाकिमों के दफ्तरों में चुल्लू भर पानी को भटकते

सरकारी कार्यालयों में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं, बोतलबंद पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं लोग जिला मुख्यालय के अधिकांश सरकारी कार्यालयों में पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है. जिस आलीशान भवन में जिले के आला अधिकारी बैठकर लोगों के कामकाज का निष्पादन करते हैं. उस कार्यालय में पदाधिकारी की बात तो दूर आम […]

सरकारी कार्यालयों में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं, बोतलबंद पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं लोग
जिला मुख्यालय के अधिकांश सरकारी कार्यालयों में पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है. जिस आलीशान भवन में जिले के आला अधिकारी बैठकर लोगों के कामकाज का निष्पादन करते हैं. उस कार्यालय में पदाधिकारी की बात तो दूर आम जनता तक के लिए पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है. अधिकांश कार्यालयों में चापाकल खराब है. सुविधा के लिए लगा आरओ मशीन शोभा की वस्तु बन कर रह गयी है.
जिले के बीचोंबीच तीन मंजिले विशाल इमारत में समाहरणालय बना हुआ है. इसमें कुल 43 विभाग कार्यरत हैं. तीन मंजिले भवन में कुल 53 कमरे हैं. इसी भवन में जिला पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक का कार्यालय भी है. यहां प्रतिदिन जिले के विभिन्न भागों से सैकड़ों लोग अपने कार्य से पहुंचते हैं, लेकिन इस विशाल परिसर में पेयजल की समस्या गंभीर है.
समाहरणालय में पीने के पानी के नाम पर दो चापाकल गड़े हुए हैं. यह दोनों चापाकल समाहरणालय परिसर के उत्तरी एवं दक्षिणी भाग में अवस्थित है. पहली मंजिल पर सभागार के नजदीक आरओ वाटर कूलर भी लगा हुआ है, लेकिन पिछले 20 दिनों से वह खराब है. खराब पड़े आरओ वाटर कूलर को ठीक कराने का निर्देश जिला पदाधिकारी गिरिवर दयाल सिंह ने दिया है. भीषण गरमी में जिले के विभिन्न भागों से आने वाले लोगों को पीने के लिए चापाकल का ही सहारा लेना पड़ता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
डीएम गिरिवर दयाल सिंह ने कहा कि समाहरणालय में पीने की पानी कोई दिक्कत नहीं है.समाहरणालय परिसर से करीब 500 गज की दूरी पर डीआरडीए का भवन है. इस परिसर में शिक्षा विभाग का कार्यालय एवं जिला परिषद, श्रम विभाग, नियोजनालय विभाग भी अवस्थित है. इस परिसर में उपविकास आयुक्त, जिला परिषद के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का कार्यालय है. इस कार्यालय में भी प्रतिदिन सैकड़ों लोग पहुंचते हैं.
डीआरडीए में पीने के पानी के लिए आम लोगों को काफी परेशानी होती है. दरअसल, इस परिसर में एक भी चापाकल नहीं है. इस कारण बाहर कसे आने वाले लोगों को सीलबंद बोतल का पानी ही पीना पड़ता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
डीडीसी उपविकास आयुक्त ने बताया कि डीआरडीए के कार्यालयों में पानी की कोई दिक्कत नहीं है. यहां बोरिंग गड़ा हुआ है और ऊपर के मंजिल पर पीने के लिए आरओ लगा हुआ है.
समाहरणालय के सीएससी सेंटर में मतदाता पहचान पत्र बनाने के लिए आये फुलपरास गोढ़ियारी के शंकर कुमार मंडल ने कहा कि चापाकल के अतिरिक्त पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं हैं.
वहीं गढ़िया से आये मो परवेज ने बताया कि आरओ वाटर के मशीन के खराब रहने के कारण पीने के पानी के लिए चापाकल ही सहारा है. गरमी में चापाकल से भी गरम पानी निकल रहा है.
अनुमंडल कार्यालय में चकदह के राजेश कुमार ने कहा कि चापाकल का पानी ही इस गरमी में सहारा है. अनुमंडल कार्यालय में हालांकि मिनरल वाटर का कंटेनर है. पर उसका पानी गरम हो जाता है. वहीं राजेश ने बताया कि पीने के लिए चापाकल तो है पर गिलास नहीं रहने के कारण परेशानी होती है.
डीआरडीए में कल्याण विभाग में कार्य कराने माधोपुर से आये संतोष साह ने बताया कि चापाकल नहीं रहने के कारण इस कार्यालय में पीने के पानी की समस्या है. बाजार से पानी खरीद कर पानी पीना पड़ता हैं.
वहीं, लौकहा से आये अनिल कुमार गुप्ता ने भी यही शिकायत की. उन्होंने कहा कि एक स्कूल में भी चापाकल रहता है पर इतने बड़े में चापाकल नहीं है. यह आश्चर्यजनक है. जिले के लोग यहां पहुंचते है ऐसे में तो यहां तीन चार चापाकल होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि 20 रुपये में दुकाने से पानी का बोतल पीने के लिए लेना पड़ा है.
सदर अस्पताल इमरजेंसी में अपने भांजे का इलाज कराने पहुंचे राजनगर के घुरन कुमार ने कहा कि पानी तो है, लेकिन बहुत दूर जाना पड़ता है. नजदीक का चापाकल खराब है. ऐसे में मातृत्व कक्ष के पास से पानी लाना पड़ता है.
जयनगर के चंदन कुमार पासवान अपने पिता के इलाज कराने आये थे. उन्होंने कहा कि इतने बड़े अस्पताल में दो चापाकल मात्र है. ओपीडी एवं मेडिकल वार्ड के पास कोई चापाकल नहीं है यह दुखद है.

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