अस्पताल के एक वारमर में 14 नवजात भर्ती
24 घंटे में एक बार ही आते हैं चिकित्सक
मधुबनी : सदर अस्पताल स्थित विशेष नवजात शिशु इकाई इन दिनों समस्याओं से जूझ रहा है. एसएनसीयू में भर्ती नवजात के परिजनों को सभी दवा बाजार से लाना पड़ता है. इसके अलावा 16 रेडियेंट वारमर में से 5 रेडियेंट वारमर कार्यरत नहीं है. जिसके कारण कार्यरत 11 वारमर में 14 नवजात को भर्ती किया गया है.
जिससे बच्चों में संक्रमण का खतरा होने की संभावना बढ गयी है. आलम यह है कि एक शिशु विशेषज्ञ चिकित्सक के सहारे ही सदर अस्पताल का एसएनसीयू व चाइल्ड ओपीडी का संचालन किया जा रहा है. चौबीस घंटे में मात्र एक बार ही चिकित्सक इन नवजात की जांच कर पाते हैं. एसएनसीयू के मुख्य द्वार का एक दरवाजा लगभग डेढ माह से टूटा हुआ है. इसके अलावा एसएनसीयू में इमरजेंसी डोर भी नहीं बनाया गया है. जबकि एसएनसीयू के डायग्राम में इमरजेंसी डोर प्रस्तावित है.
एसएनसीयू में चम्पा रामनगर निवासी पूजा देवी, सीमा कपिलेश्वर निवासी जानकी कुमारी व सिसवा निवासी शिवानी देवी का नवजात बच्चा तीन-चार दिनों से भर्ती है. भर्ती नवजात के परिजन राम सेवक यादव, हीरा देवी, जीवन देवी सहित कई परिजनों ने बताया कि डाक्टर द्वारा पर्ची पर दवा लिखकर दिया जाता है, और हमलोग दवा बाहर से लाकर देते है. राम सेवक यादव ने बताया कि केनुआ, इन्ट्राकैथ, टैक्सीमो व पिडिया सेट सभी बाहर से खरीद कर दिया गया है.
एसएनसीयू सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एसएनसीयू में इंट्राकैथ, टैक्सीमो, फिनोबारवी टोन(चमकी की दवा) आइसोलैट पी सहित कई आवश्यक दवा की किल्लत विगत एक माह से उपलब्ध नहीं है. जबकि इन सभी दवा की आवश्यकता एसएनसीयू में भर्ती प्रत्येक नवजात के लिए आवश्यक है.
16 में से 5 वारमर खराब : सदर अस्पताल में गंभीर बीमारी से संक्रमित नवजात को बेहतर व गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा के लिए जून 16 में एसएनसीयू की स्थापना किया गया. शुरू में एसएनसीयू में 12 रेडियेंट वारमर लगाया गया. जिसके बाद वर्ष 2019 में पून: 4 रेडियेंट वारमर स्थापित किया गया. वर्तमान में 16 में से 5 रेडियेंट वारमर खराब है. जिसके कारण 11 रेडियेंट वारमर में 14 नवजात को रखा गया है. जिसमें एक रेडियेंट वारमर में दो- दो नवजात को भर्ती किया गया है.
विडंबना यह है कि एक ओर सरकार नवजात शिशु को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने की कवायद कर रही है. वहीं एसएनसीयू में स्थापित कई रेडियेंट वारमर प्राय: खराब ही रहता है. ऐसे में अस्पताल प्रबंधन द्वारा एसएनसीयू जैसे सघन इकाई को नजर अंदाज करने का आरोप परिजनों द्वारा लगाया जारहा है.
