मधुबनी : जिला बुनियाद केंद्र परिसर में मंगलवार को जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग के तत्वावधान में विश्व दिव्यांग दिवस कार्यक्रम कुव्यवस्था के बीच शुरू हुआ. इस दौरान दिव्यांगों के लिये सुविधा नहीं रहने के कारण दिव्यांगों ने जमकर हो हल्ला किया. अफरा तफरी का माहौल कायम रहा. प्रशासन द्वारा बरती गयी लापरवाही सामने आयी. कार्यक्रम […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
मधुबनी : जिला बुनियाद केंद्र परिसर में मंगलवार को जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग के तत्वावधान में विश्व दिव्यांग दिवस कार्यक्रम कुव्यवस्था के बीच शुरू हुआ. इस दौरान दिव्यांगों के लिये सुविधा नहीं रहने के कारण दिव्यांगों ने जमकर हो हल्ला किया. अफरा तफरी का माहौल कायम रहा. प्रशासन द्वारा बरती गयी लापरवाही सामने आयी. कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे दिव्यांगों के बैठने के लिये भी पर्याप्त कुर्सी तक की व्यवस्था नहीं की गई.
जिस कारण कार्यक्रम के समापन तक दिव्यांगों के चेहरे पर परेशानी झलक रही थी. दिव्यांगों को प्रशिक्षण व बेहतर बनाने के लिये दिव्यांग दिवस पर कई स्पर्धा खेल का आयोजन की जाती रही है. लेकिन विडंबना है कि इस बार सभी कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया. दिव्यांगों को उपेक्षित किया गया. वजह जो भी हो, निराश्रित निधि से दिव्यांगों का मनोबन बढ़ाने, उनके जीवन में बेहतरी का राह प्रशस्त करने के लिये प्रत्येक वर्ष राशि उपलब्ध करायी जाती है. लेकिन इस बार कार्यक्रम को भुलाने का प्रयास किया गया.
दिव्यांगों के सम्मान पर दिया भाषण : एक ओर जहां कार्यक्रम में मौजूद दिव्यांग के बैठने तक का इंतजाम नहीं था, वहीं कार्यक्रम में दिव्यांगो के सम्मान व अधिकार को लेकर जमकर भाषण किया गया. उद्घाटन डीडीसी अजय कुमार, डीपीओ रश्मि वर्मा एवं सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक पूनम कुमारी ने संयुक्त रूप से की. कार्यक्रम में डीडीसी अजय कुमार ने दिव्यांगों का मनोबल बढ़ाया. उन्होंने कहा कि आज का दिन दिव्यांग लोगों के बेहतर जीवन के लिये प्रयास करने का है.
डीपीओ रश्मि वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि दिव्यांग दिवस दिव्यांगजनों को सामाजिक सम्मान दिलाने के लिये मनाया जाता है. सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक पूनम कुमारी ने गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि दिव्यांग स्वावलंबी जीवन यापन के लिये नरेगा योजना से जुड़े और रोजगार प्राप्त कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि दिव्यांगों को अवसर मिलने पर अपने क्षमता से अधिक कार्य कर सकते हैं. वहीं दूसरी ओर वाटसन स्कूल मैदान में विश्व दिव्यांग दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किये गये. कार्यक्रम में मनीषा कुमारी, नीतेश कुमार सिन्हा, राजमुनी कुमारी, रणधीर कुमार राकेश, कृष्णा कुमार,शिव शंकर प्रसाद, जगमोहन कुमार, अरुण कुमार मिश्र, सतीश कुमार मिश्र, प्रणव कुमार, सुनील कुमार, राम बाबू सहनी, रूपन कुमार आदि लोग मौजूद थे.
दिव्यांगता दिवस का यह है उद्देश्य
दिव्यांगता को सामाजिक कलंक मानने की धारणा लोगों के मन से दूर करना है. समाज में दिव्यांगों की भूमिका को बढ़ावा देने, गरीबी कम करने, बराबरी का मौका देने, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा स्थापित करना है. उनके सम्मान में आज के दिन खेल प्रतियोगिता, कला प्रदर्शनी आदि कार्यक्रम आयोजित किया जाता है. एजेंडा में समावेशी, सम्मान और विकास के लिये दिव्यांगों के सशक्तीकरण पर केन्द्रित है. उन्हें समाज में बराबरी के विकास के लिये अधिकार के बारे में लोगों को जागरूक करना. ताकि सामान्य नागरिक की तरह उनका सामाजिक और आर्थिक दशा को सुधारा जा सके.
हर दस में एक व्यक्ति है दिव्यांग
हर दस में एक व्यक्ति शारीरिक या मानसिक रूप से दिव्यांग है.इसमें कुछ संवेदनाविहीन व्यक्ति भी होते हैं. दिव्यांगता शब्द किसी को भी शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास में अवरोध पैदा करता है. ऐसे व्यक्ति को समाज में अलग नजर से देखा जाता है.दिव्यांग व्यक्ति के अधिकार के बारे में लोगों को जागरूक करने की जरूरत है. समाज में सामाजिक और आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिये पूरी सहभागिता और समानता निर्धारित करने की जरूरत है.
दिव्यांग स्वयं को लाचार नहीं मानते
दिव्यांगों की यह बड़ी बात है, कि वे अपने आप को लाचार नहीं मानते. उन्हें अक्षम न समक्षा जाए. उनके साथ सामान्य तरह से व्यवहार किया जाए. दिव्यांग मंजू सिंह, रूपा कुमारी, फूल बाबू, कुंदन राज,सिद्धार्थ कुमार आदि दिव्यांगों ने कहा कि मनोबल को समर्थन मिलना चाहिए. दिव्यांगों के सामर्थ्य के अनुरूप संभावित कार्य व प्रशिक्षण मिलने के बाद सुविधा मिलनी चाहिए.