मधुबनी. बिहार बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम-2025 में दूसरे दिन रविवार को राज्य स्तर के लिए 13 बाल वैज्ञानिकों का चयन किया गया. स्थानीय रीजनल सेकेंडरी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में चयनित बाल वैज्ञानिकों को प्रमाण पत्र एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया. चयनित बाल वैज्ञानिकों में रीजनल सेकेंडरी स्कूल मधुबनी की रितिका कुमारी, महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान दरभंगा के सानिया इमरान, यूएमएस चकला मधेपुरा के शिवम कुमार, विद्या बिहार आवासीय स्कूल पूर्णिया के श्रुति सिंह, उमावि वारा एकमा सुपौल के आर्या सिंह, सुधीर मेमोरियल सांइंस क्लब मधुबनी के प्रियम प्रियदर्शिनी, प्लस टू एलबीएसएस पलासी अररिया के अरबाज आलम, उ. मा. वि. नरियार सहरसा के शिवम कुमार, प्लस टू यू एच एस गुआलपारा मधेपुरा के प्रतिमा, शारदा विद्यापीठ लखनौर मधुबनी के आदित्य नारायण शरण, प्लस टू परियोजना बालिका उच्च विद्यालय डरहार दरभंगा के वर्षा कुमारी, आरक्षी मध्य विद्यालय कचहरी पूर्णिया के दिव्या कुमारी एवं आरएसएम पब्लिक स्कूल सुपौल के सान्वी शामिल है. वहीं जिला विद्यालय पुरस्कार मधेपुरा के प्लस टू यू एचएस गुआलपारा, पूर्णिया के विद्या बिहार रेजिडिसिंसियल स्कूल, सुपौल के उ. उ. मा. विद्यालय वारा एकमा, दरभंगा के महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान, अररिया के प्लस टू एलबीएसएस पलासी, सहरसा के उ. मा. विद्यालय नरियार एवं मधुबनी के रीजनल सेकेंडरी स्कूल को मिला. मौके पर शिक्षा विभाग के एडीपीसी सुजीत सिंह ने कहा कि विज्ञान से ही देश व समाज का विकास होगा. विज्ञान के क्षेत्र में बाल वैज्ञानिक अच्छे कर रहे हैं. सांइस एवं टेक्नोलॉजी में देश काफी आगे बढ़ रहा है. कार्यक्रम के राज्य संरक्षक सह रीजनल सेकेंडरी स्कूल के निदेशक डा. आर एस पांडेय ने कहा कि बच्चों में वैज्ञानिक सोच जरूर होना चाहिए. इससे वे देश एवं समाज के लिए बेहतर कर सकेंगे. डा. मिथिलेश कुमार झा ने कहा कि सात जिलो के बच्चों ने अच्छा प्रदर्शन किया है. बच्चों को विज्ञान में रुची बढ़ी है. डा. मीना झा ने कही की इस तरह का कार्यक्रम बच्चों को आगे बढ़ने में मदद करता है. उन्होंने साइंस फाॅर सोसाइटी को इसके लिए धन्यवाद दिया. प्रो. अरिंदम कुमार ने ने कहा कि बच्चों ने अपने प्रोजेक्ट से ये साबित किया है कि उनमें कुछ नया करने की इच्छा है. शैक्षणिक समन्वयक सह प्राचार्य डा. मनोज कुमार झा ने कहा कि दो दिनों के कार्यक्रम में सात जिलों के प्रतिभागिायों ने मधुबनी को सांइस सिटी बना दिया. ये साबित हुआ कि उनमें नवीकरण करने की क्षमता है. मौके पर शैक्षणिक निदेशक इ प्रत्यूष परिमल , राजीव कुमार, डाॅ. धीरेंद्र कुमार, डाॅ. संजीव कुमार, प्रो. अंजीत कुमार ठाकुर, रवींद्र झा, अमित कुमार शाही, राधा मोहन झा, श्रुति खन्ना, शैलेन्द्र कुमार पांडेय, शैलेन्द्र मोहन झा, ऋषि कुमार झा, सुमित कुमार चौधरी, स्वेता कुमारी, पवन कुमार सिंह सहित विभिन्न जिलों के कई शिक्षक और शिक्षिका मौजूद थी. राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद पटना के निर्देशानुसार एवं साइंस फार सोसायटी पटना के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य विषय खाद्य सुरक्षा एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं पांच उप विषय खाद्य सामग्री का बेहतर उत्पादन, भंडारण एवं परिष्करण, जैव विविधता का संवर्धन एवं जैव संसाधनों का सतत उपयोग, खर पतवार का अध्ययन एवं उनका वैकल्पिक उपयोग, मिट्टी का संरक्षण एवं प्रबंधन तथा मौसम, जलवायु एवं कृषि था.
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