अशोक ने 454106 मतों से दी बद्री पूर्वे को शिकस्त

मधुबनी : मधुबनी लोकसभा सीट के निवर्तमान सांसद व अपने पिता हुक्मदेव नारायण यादव के राजनीतिक क्षेत्र को बचाने में भाजपा के प्रत्याशी अशोक यादव न सिर्फ कामयाब रहे बल्कि इन्होंने अपने पिता को 2014 में मिले कुल मतों से अधिक मत से जीत हासिल की है. पिता की इस राजनीतिक विरासत को अशोक यादव […]

मधुबनी : मधुबनी लोकसभा सीट के निवर्तमान सांसद व अपने पिता हुक्मदेव नारायण यादव के राजनीतिक क्षेत्र को बचाने में भाजपा के प्रत्याशी अशोक यादव न सिर्फ कामयाब रहे बल्कि इन्होंने अपने पिता को 2014 में मिले कुल मतों से अधिक मत से जीत हासिल की है. पिता की इस राजनीतिक विरासत को अशोक यादव ने कायम रखा और प्रचंड मतों से जीत हासिल की. 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं की संख्या 16 लाख 27 हजार 832 थी.

मधुबनी लोकसभा सीट से 11 उम्मीदवार चुनावी रण में उतरे थे. जिनमें भाजपा नेता हुक्मदेव नारायण यादव ने 3 लाख 58 हजार 40 वोट, राजद प्रत्याशी अब्दुल बारी सिद्दीकी को 3 लाख 37 हजार 505 वोट, जदयू के गुलाम गौस को 56 हजार 392 वोट, बसपा के हरी नारायण यादव को 10 हजार 115 वोट मिले. जीत का अंतर 20535 मत था.
जनता ने खुले दिल से दिया वोट : लोकसभा चुनाव में दूर दूर तक विरोधी नजर रही आये. जीत का आंकड़ा बता रहा है कि जनता ने खुले दिल से अशोक यादव को वोट दिया. मतगणना के समाप्त होने के बाद अशोक कुमार यादव को कुल 594811 मत मिले. जबकि दूसरे नंबर पर रहे महागठबंधन के बद्री पूर्वे को कुल 140705 मत मिले. इस प्रकार अशोक कुमार यादव कुल 454106 मतों के विशाल अंतर से जीत हासिल की. यह अब तक के मधुबनी लोकसभा सीट का सबसे अधिक मतों के अंतर से जीत का आंकड़ा है.
इससे पूर्व 2004 मे हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के डा. शकील अहमद ने भाजपा के हुक्मदेव नारायण यादव को कुल 87 हजार 79 मत से पराजित किया था. 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के शकील अहमद को 3 लाख 28 हजार 182 वोट मिले. वहीं बीजेपी के हुक्मदेव नारायण यादव को 2 लाख 41 हजार 103 वोट मिले थे. इस प्रकार डा. शकील अहमद ने भाजपा के हुक्मदेव नारायण यादव को 87 हजार 79 मत से पराजित किया था. पर इस साल तो अशोक कुमार यादव ने सारे रिकार्ड को तोड़ते हुए अपार वोट हासिल किया.
जबकि 2009 मे हुये लोकसभा चुनाव में बीजेपी के हुक्मदेव नारायण यादव को 1 लाख 64094 वोट मिले. वहीं अब्दुल बारी सिद्दीकी को 1 लाख 54 हजार 769 वोट मिले. शकील अहमद को तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा. इस साल हार जीत का आंकड़ा 9325 ही रहा.

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