मरीजों को दिन में दी खिचड़ी,
(तो रात में भोजन नहीं दो सौ ग्राम की जगह मात्र पांच पीस ब्रेड थमा दिया मधुबनी : सदर अस्पताल के विभिन्न वार्डो में भर्ती मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से निर्धारित मानदंडों व मीनू के अनुरूप भोजन नहीं दिया जा रहा है. आलम यह है कि बीते रविवार को मरीजों को दिन में […]
(तो रात में भोजन नहीं दो सौ ग्राम की जगह मात्र पांच पीस ब्रेड थमा दिया
मधुबनी : सदर अस्पताल के विभिन्न वार्डो में भर्ती मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से निर्धारित मानदंडों व मीनू के अनुरूप भोजन नहीं दिया जा रहा है. आलम यह है कि बीते रविवार को मरीजों को दिन में खिचड़ी दिया गया. तो रात में भोजन ही नहीं दिया गया. दो सौ ग्राम ब्रेड की जगह अब नास्ता में मरीजों को मात्र पांच पीस ब्रेड, एक ग्लास दूध व मात्र एक केला ही दिया जा रहा है. इसकी पुष्टि विभिन्न वार्डो में भर्ती मरीजों ने की है. संध्या समय में न तो चाय और न ही बिस्किट दिया जा रहा है. रात में मिलने वाले रोटी- सब्जी से मरीजों का पेट भी नहीं भरता. ऐसा आरोप मरीजों द्वारा लगाया गया है.
नियमों की हो रही अनदेखी: सदर अस्पताल सहित जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों मे साल 2016 से ज्ञान भारती शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के द्वारा पथ्य आहार की आपूर्ति की जा रही है. मीनू के अनुसार सुबह नास्ता में प्रत्येक मरीज को पाव रोटी 200 ग्राम, दूध 200 एमएल एवं दो केला प्रति दिन देना है. जबकि दोपहर के भोजन में चावल दाल, सब्जी, दही या मौसमी फल या मिठाई देना अनिवार्य है. संध्या समय में चाय व चार पिस बिस्किट, रात में रोटी, दाल, सब्जी, मौसमी फल या मिठाया देना है. जबकि सदर अस्पताल में सुबह में चार से पांच पिस दूध, एक केला, एवं दूध दिया जा रहा है. जबकि दोपहर के भोजन मे चावल दाल एवं सब्जी दिया जा रहा है. रात में रोटी दाल दिया जा रहा है.
क्या कहते हैं मरीज: सदर अस्पताल के महिला वार्ड में पांच दिनों से भर्ती मरीज पंडौल निवासी सिंधू देवी, बेनीपट्टी निवासी रूखसाना खातुन, पुरुष सर्जिकल वार्ड में भर्ती रामपट्टी निवासी शंभू साह, बसुआरा निवासी मनोज पंडित, भोगेंद्र पासवान, ऑर्थो वार्ड में भर्ती सुशित कुमारी बताती है कि सुबह में जो नास्ता व खाना दिया जाता है वह एक तो स्वाद हीन होता है. दूसरी की इससे पेट भी नहीं भरता. पेट खाली ही रहता. कई बार इसकी शिकायत खाना व नास्ता देने आने वालों से की गयी है. पर कुछ भी सुधार नहीं हो रहा.
प्रति माह 1.50 लाख का होता है भुगतान
मरीजों को पथ्य आहार आपूर्ति किये जाने के मद में एजेंसी को करीब डेढ़ से पौने दो लाख रुपये का भुगतान किया जाता है. यही हाल जिले के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों का भी है. इस बात का खुलासा अधिकारियों द्वारा स्वास्थ्य संस्थानों के जांच क्रम में भी किया गया है. स्वास्थ्य प्रबंधन द्वारा इस मामले में रकम भुगतान के समय दस फीसदी की कटौती कर भुगतान कर कार्रवाइ की खानापूरी की जा रही है.
क्या कहते हैं अधिकारी
प्रभारी अधीक्षक डाॅ. डीएस मिश्रा ने बताया है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को रविवार की रात का खाना नहीं दिया गया है, इसकी जानकारी उन्हें मिली है. एजेसी को अगस्त माह से दस फीसदी की कटौती करने का आदेश दिया गया है.
एकरारनामा समाप्ति के बाद भी ली जा रही सेवा
जानकारी के अनुसार उक्त एजेंसी का एकरारनामा जून 2018 में ही समाप्त हो गयी. पर इसके बाद भी अस्पताल प्रबंधन द्वारा सेवा ली जा रही है. बताते चलें कि जिलाधिकारी के द्वारा फरवरी 2018 में ही साफ सफाई व पथ्य आहार के वर्तमान संस्था के एकरार को समाप्त कर नये सिरे से निविदा निकाले जाने का आदेश दिया गया था. पर अब तक इस पर अमल नहीं हो सका.