BNMU Fee Controversy: मधेपुरा. छह अगस्त को विश्वविद्यालय परीक्षा विभाग की ओर से जारी पत्र के बाद पीएचडी कोर्स वर्क 2024 एवं 2025 के परीक्षा प्रपत्र भरने के लिए निर्धारित विलंब शुल्क को लेकर छात्रों और शिक्षाविदों के बीच चर्चा तेज हो गई है. एआईएसएफ के पूर्व विश्वविद्यालय प्रभारी डॉ. हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कुलपति को पत्र लिखकर निर्णय पर कड़ी आपत्ति जतायी है.
15 सौ के शुल्क पर 15 हजार विलंब शुल्क पर सवाल
डॉ. राठौर ने अपने पत्र में कहा कि परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर से जारी पत्र (परीक्षा गो 835/26) में पीएचडी कोर्स वर्क 2024 एवं 2025 के परीक्षा प्रपत्र भरने से वंचित छात्रों को एक दिन का अतिरिक्त समय देते हुए 15 हजार रुपये विलंब शुल्क निर्धारित किया गया है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब परीक्षा प्रपत्र का मूल शुल्क 1,500 रुपये है, तो मात्र एक दिन की देरी पर 15 हजार रुपये शुल्क कैसे उचित हो सकता है.
निर्णय को बताया छात्र विरोधी
उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार का निर्णय छात्रों के हित में नहीं है. उनके अनुसार यह फैसला आर्थिक रूप से छात्रों पर अनावश्यक बोझ डालने वाला है और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए.
विश्वविद्यालय की कार्यशैली पर भी उठाए सवाल
पत्र में डॉ. राठौर ने कहा कि हाल के वर्षों में विश्वविद्यालय अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों के बजाय विवादित प्रशासनिक निर्णयों के कारण चर्चा में रहा है. उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे छात्र, शिक्षक और कर्मचारी सभी प्रभावित हो रहे हैं.
फैसला वापस नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
डॉ. राठौर ने कुलपति से निर्णय वापस लेने और परीक्षा प्रपत्र भरने की प्रक्रिया को व्यावहारिक एवं छात्रहित में बनाने की मांग की है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो इस मामले की शिकायत कुलाधिपति सह राज्यपाल से की जाएगी. साथ ही विश्वविद्यालय की वर्तमान व्यवस्था के विरोध में महापंचायत आयोजित करने की भी बात कही.
राज्यपाल को भी भेजी पत्र की प्रति
BNMU Fee Controversy: उन्होंने बताया कि इस संबंध में लिखे गए पत्र की प्रति कुलाधिपति सह राज्यपाल को भी भेजी गई है, ताकि मामले पर आवश्यक संज्ञान लिया जा सके.
