शंकरपुर की तीन नदियां सूखी, नदी की जमीन पर खेती, बढ़ा जल संकट

Water Crisis in Madhepura: जहां कभी चलती थी नाव, वहां अब उग रही मक्का-धान की फसल

Water Crisis in Madhepura: शंकरपुर, मधेपुरा से निरंजन कुमार की रिपोर्ट. मधेपुरा जिले के शंकरपुर प्रखंड से जल संकट की एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है. कभी पानी से लबालब रहने वाली मौरा झरकाहा, रामपुर लाही और जिरवा मधेली जैसी प्रमुख जलधाराएं अब पूरी तरह सूख चुकी हैं. हालत यह है कि जिन रास्तों पर कभी नावें चला करती थीं, वहां अब लोग पैदल चल रहे हैं और नदी की सूखी तलहटी पर खेती शुरू हो चुकी है.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जलधाराएं सूखते ही भू-माफिया और कुछ किसानों ने नदी की जमीन पर कब्जा कर मक्का, धान और गेहूं की खेती शुरू कर दी है. इससे क्षेत्र में भविष्य के जल संकट का खतरा और गहरा गया है.

नदियां बनीं खेत और नाले, मवेशियों के सामने पानी का संकट

ग्रामीणों के अनुसार चिलौनी नदी भी अब सूखने की कगार पर पहुंच गई है. इसमें केवल बरसात के दिनों में थोड़ी बहुत जलधारा दिखाई देती है. वहीं चापी धार पिछले करीब 25 वर्षों से मृतप्राय बनी हुई है.

जिरवा गांव से गुजरने वाली जलधारा अब गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है. इससे सबसे अधिक परेशानी पशुपालकों को हो रही है. मवेशियों के लिए पानी की भारी समस्या खड़ी हो गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो आने वाले वर्षों में पूरे इलाके में पेयजल संकट गंभीर रूप ले सकता है.

घटती बारिश और भूजल दोहन ने बढ़ाई मुश्किल

विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट के पीछे कई बड़े कारण जिम्मेदार हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों के दौरान मानसून लगातार कमजोर हुआ है. वर्ष 2020 में जहां 1498.5 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, वहीं 2024 में यह घटकर 993 मिमी तक पहुंच गई.

इसके अलावा ट्यूबवेल और निजी बोरिंग के जरिए भूजल का अत्यधिक दोहन भी संकट की बड़ी वजह माना जा रहा है. नदियों की समय पर उड़ाही नहीं होने से उनमें गाद जमा हो गई है, जिससे पानी का प्राकृतिक प्रवाह रुक गया है.

अतिक्रमण हटाने की उठी मांग

मधेपुरा और सुपौल के सीमावर्ती इलाकों के पर्यावरणविदों और ग्रामीणों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि जल्द नदियों की सफाई और अतिक्रमण हटाने का काम नहीं हुआ तो क्षेत्र का वाटर टेबल पूरी तरह खत्म हो सकता है.

ग्रामीणों ने प्रशासन से नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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