मधेपुरा की सड़कों पर मौत की रफ्तार: तीन से पांच सवारी और गायब हेलमेट बना युवाओं का ''''''''फैशन''''''''

स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब तक पुलिस सख्ती नहीं दिखाएगी,

मधेपुरा शहर की सड़कों पर इन दिनों एक खतरनाक नजारा आम हो गया है. एक ही बाइक पर सवार तीन से पांच युवक, बिना हेलमेट और तेज रफ्तार, ट्रैफिक नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाते ये युवा खुद को ””””हीरो”””” समझते हैं, लेकिन हकीकत में वे अपनी और दूसरों की जिंदगी को हर पल जोखिम में डाल रहे हैं. कॉलेजों के बाहर, मुख्य चौराहों और गली-मोहल्लों में यह लापरवाही रोजाना देखी जा सकती है. – पुलिस की कार्रवाई पर उठते सवाल – हालांकि, यातायात और सिविल पुलिस द्वारा बिना हेलमेट और ट्रिपलिंग करने वालों के खिलाफ चालान काटने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह कार्रवाई नाकाफी साबित हो रही है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब तक पुलिस सख्ती नहीं दिखाएगी, तब तक सुधार मुमकिन नहीं है. स्थानीय निवासी शंकर यादव ने बताया कि नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं और पुलिस को और कठोर होना होगा. वहीं मुरारी भगत के अनुसार, बाइक पर अधिक सवारी बैठाना अब युवाओं के लिए एक ””””फैशन”””” बन गया है, जिसके लिए सीधे तौर पर वाहनों की जब्ती जैसी कार्रवाई जरूरी है. – आंकड़ों में छिपा दर्द – सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों पर गौर करें तो सबसे अधिक मौतें उन बाइक सवारों की होती है जिन्होंने हेलमेट नहीं पहना होता. सिर में चोट लगने के कारण दुर्घटनास्थल पर ही जान चली जाती है. जानकार मानते हैं कि जब तक नियम तोड़ने वालों में कानून का डर नहीं होगा, तब तक अनुशासन नहीं लौटेगा. इसके लिए सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने और भारी जुर्माने की आवश्यकता है. – अभिभावकों की जिम्मेदारी – इस बढ़ती लापरवाही में अभिभावकों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. कई बार बच्चे घर से तीन-चार सवारी लेकर निकलते हैं, लेकिन परिजनों को इसकी भनक तक नहीं होती. बाइक पर दो से अधिक सवारी बैठाना जानलेवा साबित हो सकता है. जानकारों का कहना है कि प्रशासन की सख्ती के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और अभिभावकों का अंकुश ही इन हादसों को रोक सकता है.

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By Kumar Ashish

Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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