कठिन अनुष्ठान में व्रती भगवान भास्कर एवं छठी मैया की आराधना करेंगे.
By Kumar Ashish | Updated at :
ग्वालपाड़ा
प्रखंड क्षेत्र में लोक आस्था एवं सूर्य उपासना का चार दिवसीय महापर्व ””चैती छठ”” रविवार से नहाय-खाय के साथ पूरे श्रद्धाभाव से शुरू हो रहा है. चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन अनुष्ठान में व्रती भगवान भास्कर एवं छठी मैया की आराधना करेंगे. 25 मार्च को उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इस महापर्व का समापन होगा. सोमवार को दिनभर उपवास के बाद शाम को गुड़ एवं चावल की खीर का प्रसाद ग्रहण किया जायेगा. इसके बाद व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जायेगा. अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जायेगा. व्रती नदियों एवं तालाबों के घाटों पर पहुंचकर भगवान भास्कर को नमन करेंगे. पर्व को लेकर बाजारों में फल, सूप, दउरा एवं पूजन सामग्री की दुकानें सज गई हैं. चैती छठ का महत्व भी कार्तिक माह में होने वाली छठ पूजा के समान ही माना जाता है. मान्यता है कि चैती छठ के दौरान सूर्य उपासना करने से आरोग्य एवं सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. स्थानीय प्रशासन एवं सामाजिक कमेटियों द्वारा घाटों की साफ-सफाई एवं सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं. चैत्र की तपती धूप को देखते हुए कई जगहों पर व्रतियों के लिए टेंट एवं ठंडे पानी की व्यवस्था भी की जा रही है. चारों ओर छठी मैया के मधुर गीतों से वातावरण भक्तिमय हो गया है.