ग्वालपाड़ा, मधेपुरा.
दो दिनों से लगातार आ रही आंधी तूफान का सीधा असर ग्वालपाड़ा प्रखंड के गांवों में देखा जा सकता है. मंगलवार की रात आयी आंधी एवं बारिश से ग्वालपाड़ा प्रखंड के पंचायतों के दर्जनों गांवों में हाहाकार, खून-पसीने से सींची फसल पानी में हुई लथपथ, कौड़ियों के भाव फसल खरीदने पर व्यापारी अड़े हुये हैं. मवेशी पलकों के सामने मवेशियों के चारे का संकट उत्पन्न हो गया है. बिजली विभाग को लाखों की क्षति आंकी जा सकती है.प्रखंड क्षेत्र में बीती रात प्रकृति ने ऐसा तांडव मचाया कि आम जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया. अचानक मौसम में आए इस भयावह बदलाव, तेज आंधी, चक्रवाती तूफान एवं मूसलाधार बारिश ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया. इस प्राकृतिक आपदा ने सबसे भीषण प्रहार क्षेत्र के गरीब एवं लाचार किसानों पर किया है. मेहनत की गाढ़ी कमाई से तैयार की गई मक्के की सुनहरी फसल एवं फलदार बगीचे पल भर में तिनके की तरह बिखर गये. चारों तरफ सिर्फ तबाही एवं बर्बादी का मंजर दिखाई दे रहा है.
क्षेत्र के पीड़ित किसानों ने आंखों में आंसू लिये अपनी आपबीती सुनाई. किसानों का कहना था कि वे पिछले कई महीनों से दिन-रात एक करके मक्के की फसल को तैयार कर रहे थे. फसल की कटाई और थ्रेशिंग के बाद दाने सुखाने का काम चल रहा था. बीते दिन भी कड़ी धूप में मक्के को सुखाया गया एवं शाम होते ही उसे सुरक्षित रखने के लिये कड़ी मशक्कत के साथ एक जगह समेटकर तिरपाल और प्लास्टिक की पन्नी से ढक दिया गया था.किसान निश्चिंत होकर सोये भी नहीं थे कि देर रात अचानक आए चक्रवाती तूफान ने तबाही शुरू कर दी. हवा की रफ्तार इतनी तेज थी कि वह भारी-भरकम तिरपाल एवं पन्नियों को तिनके की तरह उड़ाकर दूर ले गयी. इसके तुरंत बाद हुई मूसलाधार बारिश ने खुले आसमान के नीचे पड़े मक्के को पूरी तरह से सराबोर कर दिया। देखते ही देखते किसानों की लहलहाती मेहनत पानी में डूबकर लथपथ हो गई. तेज झोंकों के कारण आम, लीची, कटहल, कदम और केसिया समेत दर्जनों बहुमूल्य और कीमती पेड़ जड़ से उखड़कर जमीन पर आ गिरे. आम के बगीचे के मालिक जोगिंदर ऋषिदेव, राजो दास एवं हरेंद्र सिंह सहित कई बड़े बागवानों को इस तूफान ने लाखों रुपये का चूना लगाया है.
