Madhapura News: मधेपुरा के कुमारखंड प्रखंड स्थित बेलारी पंचायत बुधवार को लोकआस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का बड़ा केंद्र बन गया. लोकदेव सोनाय महाराज की जन्मभूमि बेलारी में तीन दिवसीय सोनाय महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ, जिसमें बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और नेपाल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और अनुयायी पहुंचे. उद्घाटन समारोह में हजारों लोगों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि सोनाय महाराज केवल एक धार्मिक आस्था का नाम नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक स्मृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.
महोत्सव के दौरान लोकदेव सोनाय महाराज की जन्मस्थली और समाधि स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने तथा उनके जन्मदिन पर राजकीय महोत्सव आयोजित करने की मांग प्रमुख रूप से उठी. विभिन्न जनप्रतिनिधियों और सामाजिक नेताओं ने इसे सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया.
बेलारी में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
बेलारी पंचायत में आयोजित तीन दिवसीय सोनाय महोत्सव का उद्घाटन नेपाल के पूर्व केंद्रीय आपूर्ति मंत्री शिव कुमार मंडल, स्थानीय विधायक प्रो. रमेश ऋषिदेव, विधान पार्षद अजय कुमार सिंह और पूर्व सांसद विश्वमोहन कुमार ने संयुक्त रूप से किया.
उद्घाटन के समय पूरा परिसर श्रद्धालुओं, सांस्कृतिक समूहों और स्थानीय लोगों से भरा हुआ था. आयोजकों के अनुसार बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के साथ-साथ नेपाल से भी बड़ी संख्या में सोनाय महाराज के अनुयायी कार्यक्रम में शामिल हुए.
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग
नेपाल के पूर्व केंद्रीय आपूर्ति मंत्री शिव कुमार मंडल ने कहा कि अपने पूर्वज और आराध्य सोनाय महाराज की जन्मस्थली पर आना उनके लिए सौभाग्य की बात है. उन्होंने सोनाय महाराज की जन्मस्थली और समाधि स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग का समर्थन किया.
उन्होंने कहा कि यदि इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल का समुचित विकास किया जाए तो यह सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है.
राजकीय महोत्सव की मांग हुई तेज
विधान पार्षद अजय कुमार सिंह ने भी सोनाय महाराज के जन्मदिन पर राजकीय महोत्सव आयोजित करने की मांग दोहराई. उन्होंने कहा कि लोकदेव समाज की सांस्कृतिक धरोहर हैं और उनके इतिहास, परंपरा और योगदान को संरक्षित करना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है.
उन्होंने कहा कि सोनाय महाराज, दीना भद्री, मीरा साहब और खेदन महाराज जैसे लोकदेवों की परंपराएं क्षेत्रीय संस्कृति की अमूल्य विरासत हैं, जिन्हें आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुंचाया जाना चाहिए.
अगले वर्ष राजकीय महोत्सव के रूप में मिलने का दावा
स्थानीय विधायक प्रो. रमेश ऋषिदेव ने कहा कि सोनाय महोत्सव को राजकीय महोत्सव का दर्जा दिलाने की दिशा में प्रयास आगे बढ़ चुके हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि अगले वर्ष यह आयोजन राजकीय महोत्सव के रूप में आयोजित किया जा सकता है.
यह बयान स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से क्षेत्र में इस महोत्सव को सरकारी स्तर पर मान्यता और संरक्षण दिलाने की मांग उठती रही है.
Madhapura News: सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण पर जोर
पूर्व सांसद विश्वमोहन कुमार ने कहा कि गांव-गांव में स्थित सोनाय महाराज से जुड़ी संपत्तियों, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक स्मृतियों का संरक्षण और विकास आवश्यक है. उनके अनुसार सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से स्थानीय समाज को पहचान, पर्यटन और आर्थिक अवसर तीनों मिल सकते हैं.
कार्यक्रम की अध्यक्षता सोनाय एकलव्य चेतना परिषद के अध्यक्ष रामकृष्ण मंडल ने की. महोत्सव के पहले दिन विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ आयोजन का शुभारंभ हुआ.
स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक एकता को भी मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बेलारी स्थित सोनाय महाराज की जन्मस्थली को पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाता है, तो इसका लाभ स्थानीय व्यापार, परिवहन, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों को भी मिल सकता है.
फिलहाल तीन दिवसीय सोनाय महोत्सव की शुरुआत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि लोकदेवों से जुड़ी परंपराएं आज भी ग्रामीण समाज में गहरी आस्था और सामाजिक एकजुटता का आधार बनी हुई हैं.
