ऑनलाइन सत्र में प्रस्तुत किये गये छह शोध-पत्र

ऑनलाइन सत्र में प्रस्तुत किये गये छह शोध-पत्र

मधेपुरा. कोसी की सांस्कृतिक विरासत विषयक सेमिनार का एक सत्र ऑनलाइन शनिवार को हुआ. इसकी अध्यक्षता बीएनएमयू के प्राचीन भारतीय इतिहास व संस्कृति विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो ललन प्रसाद अद्री ने की. उन्होंने कहा कि कीर्ति बाबू ने अपने कर्मों के बल पर कोसी-सीमांचल में शैक्षणिक क्रांति ला दी. कार्यक्रम में विषय प्रवेश समन्वयक (एनएसएस) डॉ सुधांशु शेखर ने किया. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का नामकरण ””कीर्ति कुम्भ”” अत्यंत ही समीचीन है. इस सत्र में छह शोध-पत्र प्रस्तुत किये गये. बीएनएमयू के शोधार्थी सुनंदा कुमारी ने कोशी की सांस्कृतिक व राजनीतिक परिदृश्य विषय पर विचार व्यक्त किये. मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के शिव नारायण सिंह के शोध-पत्र का विषय था. ब्रिटिश औद्योगिक नीतियों का बिहार के घरेलू उद्योगों पर प्रभाव. रमेश झा महिला महाविद्यालय, सहरसा में अतिथि व्याख्याता डॉ रूबी कुमारी ने भारत के प्राचीन इतिहास में कोशी का स्थान को रेखांकित किया. ऑनलाइन सत्र का संचालन राजनीति विज्ञान विभाग, महिला महाविद्यालय, खगड़िया में असिस्टेंट प्रो डॉ प्रियंका सिंह ने किया. तकनीकी पक्ष शोधार्थी डॉ सौरभ कुमार चौहान व विद्यार्थी विवेक शर्मा ने संभाला. मौके पर गणित विभागाध्यक्ष ले डॉ गुड्डू कुमार, मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ राकेश कुमार, बीएड विभागाध्यक्ष डॉ जावेद अहमद, बीसीए विभागाध्यक्ष केके भारती, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ शंभू पासवान (मुंगेर), सीनेटर डॉ रंजन कुमार, शोधार्थी डॉ सारंग तनय, डॉ मणीष कुमार, डॉ सोनम, डॉ अचला विवेकानंद, रणवीर कुमार, राजदीप कुमार, अशोक मुखिया आदि उपस्थित थे.

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Published by: Kumar ashish

कुमार आशीष 15 वर्षों से प्रभात खबर समूह के साथ पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से जनसंचार में डिग्री प्राप्त करने के बाद इन्होंने राजनीति, अपराध और कोसी अंचल की रिपोर्टिंग में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पिछले पांच वर्षों से सक्रिय हैं. पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए इन्हें नेपाल में 'अंतरराष्ट्रीय मैथिली युवा पत्रकारिता सम्मान' से नवाजा जा चुका है.

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