Singheshwar Nath Temple: सावन की अंतिम सोमवारी पर मधेपुरा के प्रसिद्ध सिंहेश्वरनाथ धाम में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ने वाला है, जिसके लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी तैयारियों में से एक की है. बिहार के अलग-अलग जिलों के अलावा बंगाल और पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में कांवरियों और श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है.
प्रशासन और मंदिर न्यास समिति का अनुमान है कि अंतिम सोमवारी पर पांच लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा सिंहेश्वरनाथ का जलाभिषेक कर सकते हैं. श्रद्धालुओं की इस संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, यातायात, कतार, प्रवेश-निकास और मंदिर परिसर की व्यवस्था को लेकर विशेष प्लान तैयार किया गया है.
शनिवार से ही धाम में कांवरियों की आवाजाही बढ़ गयी है. कोई बाबा के दर्शन के बाद महादेवपुर घाट की ओर जा रहा है, तो कोई सोमवार के जलाभिषेक की तैयारी में जुटा है. ऐसे में रविवार रात से सोमवार तक सिंहेश्वर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ने की संभावना है.
लखीसराय की घटना के बाद प्रशासन और ज्यादा सतर्क
अंतिम सोमवारी की तैयारियों में प्रशासन ने इस बार विशेष सतर्कता बरती है. हाल ही में लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में तीसरी सोमवारी के दौरान हुई भगदड़ की घटना के बाद बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन को लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ी है.
इसी को ध्यान में रखते हुए सिंहेश्वरनाथ धाम में पुलिस, प्रशासन, मंदिर न्यास समिति और स्वयंसेवकों को अलर्ट मोड पर रखा गया है.
पिछली सोमवारी में करीब 600 पुलिस बल और 250 पुलिस पदाधिकारी तैनात किये गये थे. अंतिम सोमवारी पर संभावित भीड़ को देखते हुए इस बार 1000 पुलिस जवान और करीब 450 पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गयी है.
अकेले मंदिर परिसर में करीब 400 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे. प्रमुख चौक-चौराहों, प्रवेश-निकास द्वारों और संवेदनशील स्थानों पर 150 से अधिक दंडाधिकारी भी निगरानी करेंगे.
रविवार रात 10 बजे से 24 घंटे नो-व्हीकल जोन
श्रद्धालुओं की भीड़ के साथ सबसे बड़ी चुनौती यातायात व्यवस्था की होगी. इसे देखते हुए रविवार रात 10 बजे से सोमवार रात 10 बजे तक सिंहेश्वर की मुख्य सड़क और बाजार की ओर आने वाले प्रमुख मार्गों को नो-व्हीकल जोन रखा जायेगा.
छोटे-बड़े वाहनों को पुलिस लाइन और नारियल विकास बोर्ड के पास ही रोक दिया जायेगा. मंदिर और मुख्य सड़क के आसपास वाहनों का दबाव नहीं बढ़े, इसके लिए मंदिर से दूर पार्किंग की व्यवस्था की गयी है.
श्रद्धालुओं को वाहन निर्धारित पार्किंग में खड़ा करने के बाद पैदल मंदिर तक जाना होगा. पार्किंग स्थलों और प्रमुख मार्गों पर भी पुलिस बल तैनात रहेगा.
500 मीटर की कतार के बाद अर्घा से होगा जलाभिषेक
श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश और निकास का अलग-अलग रूट बनाया गया है. मुख्य गेट से प्रवेश करने के बाद श्रद्धालुओं को प्रतिमा सिंह धर्मशाला के बगल से होते हुए शिवगंगा के पास कतार में लगना होगा.
इसके बाद मजबूत लोहे की बैरिकेडिंग के बीच श्रद्धालुओं को चरणबद्ध तरीके से मंदिर की ओर ले जाया जायेगा. करीब 500 मीटर लंबी कतार पूरी करने के बाद श्रद्धालु अर्घा से बाबा सिंहेश्वरनाथ का जलाभिषेक करेंगे.
महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग कतार रहेगी. मुख्य प्रवेश द्वार से गर्भगृह तक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार निगरानी करेंगे.
अगर किसी समय भीड़ का दबाव अचानक बढ़ता है तो श्रद्धालुओं को छोटे-छोटे समूहों में आगे बढ़ाया जायेगा. जलाभिषेक के बाद उन्हें निर्धारित निकास मार्ग से तत्काल बाहर भेजने की व्यवस्था होगी, ताकि मंदिर परिसर के भीतर भीड़ जमा न हो.
डाक बम कांवरियों के लिए भी विशेष इंतजाम
रविवार देर रात से डाक बम कांवरियों के पहुंचने की संभावना है. इसे देखते हुए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है.
भीड़ बढ़ने की स्थिति में श्रद्धालुओं की आवाजाही को कुछ समय के लिए रोककर चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जायेगा. इसका उद्देश्य किसी एक स्थान पर अचानक भीड़ का दबाव बनने से रोकना है.
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती डाक बम कांवरियों की तेज आवाजाही और सामान्य श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या के बीच संतुलन बनाने की होगी.
100 गार्ड और 250 स्वयंसेवक भी रहेंगे तैनात
सुरक्षा व्यवस्था केवल पुलिस और प्रशासन के भरोसे नहीं रहेगी. मंदिर न्यास समिति के सुरक्षा गार्ड और स्थानीय स्वयंसेवक भीड़ प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे.
व्यवस्था में 100 सुरक्षा गार्ड और 250 स्वयंसेवक शामिल रहेंगे. इनमें युवा संघ के 100 और श्रृंगी ऋषि सेवा फाउंडेशन के 150 स्वयंसेवक शामिल हैं.
ये स्वयंसेवक श्रद्धालुओं को कतार में आगे बढ़ाने, सही मार्ग बताने, बुजुर्गों और महिलाओं की मदद करने तथा पुलिस-प्रशासन के साथ भीड़ नियंत्रण में सहयोग करेंगे.
मंदिर न्यास समिति के प्रबंधक भवेश कुमार ने बताया कि न्यास की ओर से सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ायी गयी है. विभिन्न संगठनों से स्वयंसेवकों की संख्या बढ़ाने का भी अनुरोध किया गया है.
उमस और भीड़ के बीच साफ-सफाई पर भी नजर
अंतिम सोमवारी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाएं भी महत्वपूर्ण रहेंगी.
गर्मी और उमस को देखते हुए मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में सफाईकर्मियों की तैनाती की गयी है. प्रशासन की कोशिश है कि श्रद्धालुओं को लंबी कतार में खड़े रहने के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं हो.
सीओ नवीन कुमार सिंह ने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य लाखों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ के बावजूद आयोजन को सुरक्षित, सुगम, व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराना है.
रात 9:30 बजे बंद होंगे मंदिर के पट, रात 1 बजे खुलेंगे
अंतिम सोमवारी पर मंदिर के पट खुलने और बंद होने का समय भी तय कर दिया गया है.
धर्मप्रेमियों की मांग को देखते हुए रविवार रात 9:30 बजे भोग और आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिये जायेंगे. सरकारी पूजा रात साढ़े 12 बजे तक पूरी करने के बाद सोमवार रात 1 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए पट खोल दिये जायेंगे.
इस व्यवस्था से बाबा को विश्राम देने के साथ ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.
Singheshwar Nath Temple: पहली तीन सोमवारी की भीड़ ने बढ़ायी प्रशासन की चिंता
मंदिर न्यास समिति के सदस्य विजय कुमार सिंह के अनुसार, पहली, दूसरी और तीसरी सोमवारी में पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे.
अंतिम सोमवारी पर भीड़ और बढ़ने की संभावना है. इसी आधार पर पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया गया है.
ऐसे में सिंहेश्वरनाथ धाम की अंतिम सोमवारी सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रशासन की भीड़ प्रबंधन क्षमता की भी बड़ी परीक्षा होगी.
