चौसा. प्रखंड मुख्यालय स्थित डॉ भोला प्रसाद जायसवाल के आवास परिसर में एक दिवसीय कबीर महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रमोद साहेब ने की. महोत्सव में उपस्थित संतों ने श्रद्धालुओं को सत्य के मार्ग पर चलने की सीख दी और कबीर के संदेश को घर-घर पहुंचाने का संकल्प लिया. सत्संग में मुख्य प्रवक्ता के रूप में कबीर आश्रम नेपाल से आये संत उमा साहेब ने कहा कि पवित्र भावना से किया गया. कर्म हमेशा सुखद परिणाम लाता है. केवल आंख खोल लेने से जागरण नहीं होता जब मन में संसार का आकर्षण समाप्त हो जाता है. वही असली जागरण होता है. उन्होंने कहा कि मानव जीवन में सत्संग की बड़ी आवश्यकता है. हमारे जीवन में सत्संग को अपनाए बिना सुख, शांति की कल्पना नहीं की जा सकती. सत्संग की बड़ी महिमा है. सत्संग से सुख की वर्षा होती है. लोग सच्चाई के रास्ते पर चलने के लिए सत्संग में सीखते हैं. इसलिए सत्संग का आयोजन मानव समाज को मानवता का पाठ भी समय-समय पर पढ़ाता है. संत नामदेव साहेब ने कहा कि संत कबीर की वाणी को समझने और लोगों को समझाने की जरूरत है. कई पीढ़ी गुजर चुकी है फिर भी हमारे समाज में अंधविश्वास, नफरत एवं भेदभाव जैसी कुरीतियां व्याप्त है. कबीर की वाणी सामाजिक परिवर्तन का संदेश देने वाली है. समाज मे सत्य और झूठ के बीच एक युद्ध चल रहा है. संत शंभू शरण साहेब ने कबीर साहब के जीवन पर प्रकाश डालते हुये उन्हें सत्य व यथार्थवादी संत की संज्ञा दी. वक्ताओं ने कहा कि संत कबीर के अनुसार सभी मानव एक समान है. मानव की जाति व धर्म एक है. उन्होंने श्रद्धालुओं का आवाह्न करते हुए कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को संस्कार युक्त शिक्षा दें. इससे कि वे एक बेहतर मनुष्य बन सकें. मौके पर छेदी साहेब, सुमन साहेब, मदन साहेब, कैलाश साहेब, सुमित कुमार, चंदन देवी, गोपाल भगत, सुरेश साहेब, शिवशंकर पासवान, महेंद्र जायसवाल, डॉ भोला प्रसाद जायसवाल आदि उपस्थित थे.
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