ग्रामीण क्षेत्रों में खुलेआम बिक रहा रिटायर मुर्गा, स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा

सस्ती कीमत के कारण लोग इसे खरीद भी रहे हैं,

– सस्ते के लालच में रिटायर मुर्गी खरीद रहे लोग, बढ़ रहा बीमारी का खतरा

– गांव-गांव ऑटो से बिक रहा रिटायर मुर्गी नियमों की उड़ रही धज्जियां

– बिना जांच के बिक रहे मुर्गे, सेहत से हो रहा खिलवाड़

उदाकिशुनगंज

प्रखंड क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों ऑटो के माध्यम से बिना किसी रोक-टोक के रिटायर मुर्गी बेचे जाने का मामला सामने आ रहा है. महज एक सौ रुपये प्रति पीस की दर से बेचे जा रहे रिटायर मुर्गी की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है.

जानकारी के अनुसार ये रिटायर मुर्गे वे होते हैं जो लगातार अंडा देने के बाद बंद कर देते हैं या कम देने लगते हैं. ऐसे मुर्गों को पोल्ट्री फार्म संचालक कम कीमत पर बेच देते हैं, जिन्हें फिर ग्रामीण इलाकों में लाकर सस्ते दामों पर बेचा जा रहा है. सस्ती कीमत के कारण लोग इसे खरीद भी रहे हैं, लेकिन इसके सेवन से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न होने का खतरा बना हुआ है. लोगों का कहना है कि ऑटो पर लादकर गांव-गांव घूमकर इन मुर्गों की बिक्री की जा रही है, जबकि इनके स्वास्थ्य जांच या गुणवत्ता को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है. बिना पशु चिकित्सा जांच के इस तरह की बिक्री से संक्रामक बीमारियों के फैलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक अंडा देने वाले मुर्गों में संक्रमण या अन्य बीमारियों का खतरा अधिक रहता है, जिससे उनका मांस स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. ऐसे में बिना जांच के इस प्रकार के मुर्गों का सेवन करने से लोगों को सावधान रहने की जरूरत है. मो मनौव्वर हुसैन ने प्रशासन से मांग की है कि इस पर तत्काल रोक लगाई जाए और संबंधित विभाग द्वारा जांच कर उचित कार्रवाई की जाए, ताकि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो सके. वही मो कियाम चौधरी ने कहा कि लंबे समय तक अंडा देने वाले मुर्गों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है. ऐसे में बिना जांच के इनके मांस का सेवन करने से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है. उन्होंने प्रशासन से इस पर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है. उनका कहना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकता है.

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By Kumar Ashish

Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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