मधुबनी.
प्रत्येक वर्ष 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसका उद्देश्य रेबीज की रोकथाम के लिए लोगों जागरूक करना है. 28 सितंबर को 19वां विश्व रेबीज दिवस मनाया गया. विश्व रेबीज दिवस वर्ष 2025 का थीम अभी कार्रवाई करें : आप, हम, समुदाय ” यह विषय रेबीज की रोकथाम और नियंत्रण के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता को पुष्ट करता है और रेबीज उन्मूलन में व्यक्तिगत और सामुदायिक भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देता है. रेबीज का खतरा केवल कुत्ते के काटने से ही नहीं बल्कि अन्य जानवरों के काटने से भी होता है. यह वायरस से फैलने वाला एक बेहद गंभीर रोग है. रेबीज एक ऐसा वायरल इंफेक्शन है जो आमतौर पर संक्रमित जानवरों के काटने से फैलता है. कुत्ते, बिल्ली, बंदर आदि कई जानवरों के काटने से इस बीमारी का वायरस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है. रेबीज का वायरस कई बार पालतू जानवर के चाटने या खून का जानवर के लार से सीधे संपर्क में आने से भी फैल जाता है. रेबीज एक जानलेवा रोग है. इसका लक्षण बहुत देर में नजर आता हैं. अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह रोग जानलेवा साबित हो सकता है.क्या है रेबीज के लक्षण
बुखार, सिरदर्द, घबराहट या बेचैनी, व्याकुलता, भ्रम की स्थिति, खाना-पीना निगलने में कठिनाई, बहुत अधिक लार निकलना, पानी से डर लगना, नींद नही आना एवं शरीर के किसी एक अंग में पैरालिसिस यानी लकवा मार जाना आदि रेबीज के लक्षण है.किसी भी जानवर के काटने पर क्या करें
सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. भवेश कुमार झा कुमार ने कहा कि अगर रेबीज से संक्रमित किसी बंदर या कुत्ते ने काट लिया तो तुरंत इलाज कराना चाहिए. काटे हुए स्थान को कम से कम 10 से 15 मिनट तक साबुन या डेटाल से साफ करें. जितना जल्दी हो सके वैक्सीन या एआरवी के टीके लगवाएं. पालतू कुत्तों को इंजेक्शन लगवाएं.किसी भी जानवर के काटने पर क्या नहीं करें
डॉक्टर भवेश कुमार झा ने कहा कि रेबीज से संक्रमित किसी कुत्ते या बंदर आदि के काटने पर इलाज में लापरवाही न बरतें. घाव अधिक है तो उस पर टांके न लगवाएं. रेबीज के संक्रमण से बचने के लिए कुत्ते व बंदरों आदि के अधिक संपर्क में न आएं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
