मधेपुरा : किसी दुर्घटना, सर्पदंश या अन्य असामान्य परिस्थिति में मौत के बाद परिजनों के सामने अपनों को खोने का दुख तो होता ही है, शव के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ती है. इसी दौरान सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के नाम पर मृतकों के परिजनों से कथित तौर पर अलग से पैसे मांगने के आरोप सामने आये हैं. परिजनों का कहना है कि उनसे 3,000 से 5,000 रुपये तक की राशि मांगी जाती है. हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. स्वास्थ्य समिति के प्रबंधक (डीपीएम) प्रिंस कुमार ने मामले को संज्ञान में लेकर जांच कराने की बात कही है.
परिजनों का आरोप, मजबूरी का उठाया जाता है फायदा
मृतक के कुछ परिजनों ने आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान उनसे अलग से राशि की मांग की जाती है. उनके अनुसार, 3,000 से 5,000 रुपये तक की मांग की जाती है. आर्थिक रूप से कमजोर, मजदूर और दैनिक मजदूरी करने वाले परिवारों के लिए अचानक इतनी राशि जुटाना मुश्किल होता है.
परिजनों का कहना है कि परिवार का सदस्य जब दुनिया से चला जाता है, तो उस समय उनका पूरा ध्यान शव को घर ले जाने और अंतिम संस्कार की तैयारी पर होता है. ऐसे में यदि पोस्टमार्टम के दौरान अतिरिक्त राशि की मांग की जाये, तो परेशानी और बढ़ जाती है.
सर्पदंश से बच्चे की मौत के मामले में भी पैसे मांगने का आरोप
बिहारीगंज क्षेत्र के एक परिवार ने आरोप लगाया कि सर्पदंश से तीन वर्षीय बच्चे की मौत के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाया गया था. परिजनों का दावा है कि पोस्टमार्टम करने वाले कर्मियों की ओर से 3,000 रुपये की मांग की गयी. हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
ऐसे मामलों में कई परिजन शिकायत करने के बजाय किसी तरह राशि की व्यवस्था कर शव लेकर घर जाना ज्यादा जरूरी समझते हैं. इससे कथित रूप से मांगी गयी राशि का मामला सामने नहीं आ पाता.
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया और शुल्क की हो स्पष्ट जानकारी
पोस्टमार्टम के नाम पर किसी प्रकार की राशि की मांग की जा रही है या नहीं, यह जांच का विषय है. यदि किसी कर्मचारी या संबंधित व्यक्ति द्वारा निर्धारित सरकारी प्रक्रिया से अलग हटकर पैसे की मांग की जा रही है, तो मामले की जांच जरूरी है. वहीं, किसी भी आरोप की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है.
अस्पताल स्तर से यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि पोस्टमार्टम के लिए परिजनों को कौन-कौन सी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं और क्या इसके लिए कोई सरकारी शुल्क निर्धारित है. यदि कोई शुल्क निर्धारित है, तो उसकी आधिकारिक जानकारी और रसीद की व्यवस्था होनी चाहिए.
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर बढ़ता है बोझ
परिवार में कमाने वाले सदस्य की मौत होने पर पहले से ही आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है. दुर्घटना या अन्य घटना के बाद इलाज, आने-जाने और शव को घर तक ले जाने में भी परिवार को खर्च करना पड़ता है. ऐसे में पोस्टमार्टम से जुड़ी प्रक्रिया में अतिरिक्त राशि की मांग का आरोप परिवार की परेशानी और बढ़ा देता है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में होने वाली सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी होनी चाहिए. किसी सेवा के लिए शुल्क निर्धारित है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध करायी जानी चाहिए और भुगतान की स्थिति में रसीद दी जानी चाहिए.
डीपीएम बोले- मामला संज्ञान में आया, जांच करायी जायेगी
इस संबंध में स्वास्थ्य समिति के प्रबंधक (डीपीएम) प्रिंस कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है. इसकी जांच करायी जायेगी. जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो आवश्यक कार्रवाई की जायेगी.
अब लोगों की नजर जांच की कार्रवाई पर है. मृतक के परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान यदि किसी स्तर पर अनधिकृत राशि की मांग की जा रही है, तो उसे रोका जाना चाहिए और परिजनों को पूरी प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध करायी जानी चाहिए.
