फणीश्वर नाथ रेणु थे मनोवैज्ञानिक कथाकार - प्रो विनय

फणीश्वर नाथ रेणु थे मनोवैज्ञानिक कथाकार - प्रो विनय

मधेपुरा. भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में मंगलवार को विश्वविद्यालय हिंदी विभाग व आइक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में फणीश्वर नाथ रेणु की जयंती के अवसर पर रेणु के साहित्य की वर्तमान प्रासंगिकता नामक विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ दीपक कुमार गुप्ता ने की. संगोष्ठी में विशिष्ट वक्ता के रूप रमेश झा महिला महाविद्यालय सहरसा की प्राचार्या प्रो उषा सिन्हा थी. प्राचार्या ने फणीश्वर नाथ रेणु के व्यक्तित्व को उद्घाटित करते हुये फणीश्वर नाथ रेणु के साहित्य में निहित जातिवाद को अभिव्यक्त किया. जिसके लिए प्राचार्या ने फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी पंचलाइट का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उस समय की परिस्थितियों को आज के संदर्भ प्रासंगिक बताया. पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो विनय कुमार चौधरी ने फणीश्वर नाथ रेणु को मनोवैज्ञानिक कथाकार बताया. उन्होंने कहा कि फणीश्वर नाथ रेणु में अश्लील बातों को शालीनता से कहने की अद्भुत शक्ति थी. पीजी सेंटर सहरसा के हिंदी विभाग के एसोसियेट प्रोफेसर डॉ सिद्धेश्वर काश्यप ने फणीश्वर नाथ रेणु के साहित्य में स्त्री अस्मिता को आज के संदर्भ में प्रासंगिक बताया. मानविकी संकाय के संकायाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार मल्लिक, रसायनशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो नरेश कुमार, समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ राणा सुनील कुमार सिंह, डॉ वीर किशोर सिंह, मणिभूषण वर्मा, पूर्व प्रॉक्टर डॉ बीएन विवेका समेत अन्य शिक्षकों ने फणीश्वर नाथ रेणु के साहित्य पर वक्तव्य प्रस्तुत किया. मंच संचालन हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ पूजा गुप्ता ने की. कार्यक्रम के अंत में गत दिनों सेवानिवृत्त हुए विभागाध्यक्ष डॉ विनोद मोहन जायसवाल को विभाग की ओर से सम्मानित किया गया. मौके पर अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ मिथिलेश कुमार अरिमर्दन, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ विवेक प्रकाश सिंह, पूर्व परिसंपदा पदाधिकारी डॉ अमरेंद्र कुमार, डॉ प्रफुल्ल कुमार, डॉ सदय कुमार, डॉ अनिल कुमार, विभीषण कुमार, प्रवीण कुमार, नन्ही कुमारी, स्वाति रंजन, तनुप्रिया, सुमित कुमार, दिव्यांशु मयंक, रोशनी, स्मृति, कृति आदि उपस्थित थे. मधेपुरा. भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में मंगलवार को विश्वविद्यालय हिंदी विभाग व आइक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में फणीश्वर नाथ रेणु की जयंती के अवसर पर रेणु के साहित्य की वर्तमान प्रासंगिकता नामक विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ दीपक कुमार गुप्ता ने की. संगोष्ठी में विशिष्ट वक्ता के रूप रमेश झा महिला महाविद्यालय सहरसा की प्राचार्या प्रो उषा सिन्हा थी. प्राचार्या ने फणीश्वर नाथ रेणु के व्यक्तित्व को उद्घाटित करते हुये फणीश्वर नाथ रेणु के साहित्य में निहित जातिवाद को अभिव्यक्त किया. जिसके लिए प्राचार्या ने फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी पंचलाइट का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उस समय की परिस्थितियों को आज के संदर्भ प्रासंगिक बताया. पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो विनय कुमार चौधरी ने फणीश्वर नाथ रेणु को मनोवैज्ञानिक कथाकार बताया. उन्होंने कहा कि फणीश्वर नाथ रेणु में अश्लील बातों को शालीनता से कहने की अद्भुत शक्ति थी. पीजी सेंटर सहरसा के हिंदी विभाग के एसोसियेट प्रोफेसर डॉ सिद्धेश्वर काश्यप ने फणीश्वर नाथ रेणु के साहित्य में स्त्री अस्मिता को आज के संदर्भ में प्रासंगिक बताया. मानविकी संकाय के संकायाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार मल्लिक, रसायनशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो नरेश कुमार, समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ राणा सुनील कुमार सिंह, डॉ वीर किशोर सिंह, मणिभूषण वर्मा, पूर्व प्रॉक्टर डॉ बीएन विवेका समेत अन्य शिक्षकों ने फणीश्वर नाथ रेणु के साहित्य पर वक्तव्य प्रस्तुत किया. मंच संचालन हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ पूजा गुप्ता ने की. कार्यक्रम के अंत में गत दिनों सेवानिवृत्त हुए विभागाध्यक्ष डॉ विनोद मोहन जायसवाल को विभाग की ओर से सम्मानित किया गया. मौके पर अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ मिथिलेश कुमार अरिमर्दन, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ विवेक प्रकाश सिंह, पूर्व परिसंपदा पदाधिकारी डॉ अमरेंद्र कुमार, डॉ प्रफुल्ल कुमार, डॉ सदय कुमार, डॉ अनिल कुमार, विभीषण कुमार, प्रवीण कुमार, नन्ही कुमारी, स्वाति रंजन, तनुप्रिया, सुमित कुमार, दिव्यांशु मयंक, रोशनी, स्मृति, कृति आदि उपस्थित थे.

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