मधेपुरा. बच्चों को दस्त व डायरिया से सुरक्षित रखने के लिए 15 दिवसीय दस्त नियंत्रण पखवारा चलाया जा रहा है. इस दौरान कर्मियों द्वारा घर-घर जाकर ओआरएस के पैकेट का वितरण किया जा रहा है. मौसम में हो रहे बदलाव से शिशुओं में दस्त (डायरिया) का खतरा बढ़ जाता है. इससे बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा 15 दिवसीय दस्त नियंत्रण पखवारा चलाया जा रहा है. सिविल सर्जन डॉ मिथलेश ठाकुर ने बताया कि दस्त एक गंभीर बीमारी है, जो ज्यादातर छोटे बच्चों में होने की आशंका होती है. हालांकि बड़े लोग भी इसके शिकार हो सकते हैं. ज्यादा दिन तक दस्त होने से डायरिया होने की संभावना होती है. इससे निबटने के लिए पखवारा चलाया जा रहा है. सेविकाओं के द्वारा घर-घर जाकर लोगों को ओआरएस, जिंक कॉर्नर का पैकेट दिया जायेगा. इसके अलावा सभी स्वास्थ्य केंद्रों व उपकेंद्रों पर भी ओआरएस के पैकेट उपलब्ध रहेंगे, जहां से लोग इसे आसानी से ले सकते हैं. बच्चों को दी जायेगी ओआरएस पैकेट व जिंक की गोलियां सिविल सर्जन ने बताया कि मल की अवस्था में बदलाव या सामान्य से ज्यादा पतला या पानी जैसे होने वाला मल को दस्त कहते हैं. गर्मी के मौसम में बच्चों में दस्त की समस्या ज्यादा होती है. दो-चार दिनों से ज्यादा समय तक हो रहे दस्त डायरिया में तब्दील हो सकता है. इसी को खत्म करने के लिए दस्त नियंत्रण पखवारा चलाया जा रहा है. जिले में सभी बच्चों को एक ओआरएस पैकेट जिंक की गोलियां दी जायेगी व जो बच्चे डायरिया से ग्रसित है उन्हें दो ओआरएस के पैकेट व 14 जिंक की गोलिया दी जायेगी. इसके लिए आशा व एएनएम घर-घर तक जायेगी. दस्त से बचाव की जानकारी देने के लिए जिले में जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है. उन्होंने कहा अगर किसी क्षेत्र में अति कुपोषित बच्चा व दस्त से ग्रसित है, तो उसे तुरंत अपने नजदीकी अस्पताल में जांच करवाएं. इससे बच्चों को डायरिया ग्रसित होने से बचाया जा सकता है. ओआरएस व जिंक से होगा दस्त का असरदार इलाज किसी को दस्त की समस्या है, तो उसे ओआरएस का घोल व जिंक की गोलियां देनी चाहिये. यह दस्त से उबारने का बिल्कुल असरदार इलाज है. दस्त शुरू होते ही हर दस्त के बाद ओआरएस घोल लेना चाहिये. जब तक की दस्त पूरी तरह ठीक न हो जाय प्रत्येक वर्ष के बाद ओआरएस घोल दो माह से कम आयु के बच्चों को पांच चम्मच, दो माह से दो वर्ष तक के बच्चों को एक चौथाई से आधा कप, दो वर्ष से पांच वर्ष तक के बच्चों को आधा से एक कप देना है. वहीं दो माह से छह माह तक के बच्चों को जिंक की आधी गोली(10 मि.ग्रा) व छह माह से पांच साल तक के बच्चों को एक गोली(20 मि.ग्रा) साफ पानी या मां के दूध में घोलकर पिलाना चाहिए.
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