उर्दू के विकास एवं संवर्धन में नीतीश कुमार की बड़ी भूमिका: प्रो फिरोज मंसूरी

राज्य में उर्दू की उन्नति के लिए व्यावहारिक कदम लगातार उठाए जा रहे हैं.

फरोग-ए-उर्दू सेमिनार, कार्यशाला एवं मुशायरा संपन्न-

मधेपुरा.

मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, उर्दू निदेशालय, पटना के तत्वावधान में जिला स्तरीय “फरोग-ए-उर्दू सेमिनार, कार्यशाला एवं मुशायरा 2025-26” का भव्य एवं सफल आयोजन उर्दू भाषा कोषांग समाहरणालय द्वारा किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन एडीएम अरुण कुमार सिंह द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया. दीप प्रज्वलन के अवसर पर जिला उर्दू भाषा कोषांग नोडल ऑफिसर मो सरवर आलम अंसारी एवं बिहार राज्य उर्दू सलाहकार समिति सदस्य प्रो डॉ फिरोज मंसूरी उपस्थित रहे. इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो डॉ फिरोज मंसूरी ने अपने संबोधन में कहा कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी साझा तहज़ीब, गंगा-जमुनी संस्कृति एवं राष्ट्रीय एकता की सशक्त पहचान है. उन्होंने कहा कि उर्दू समाजवाद, समानता एवं सामाजिक न्याय की भाषा है. इसे जीवित एवं सशक्त बनाए रखने के लिये शैक्षणिक सुदृढ़ीकरण, रोजगार से जुड़ाव तथा सांस्कृतिक-साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देना आवश्यक है. उन्होंने प्राथमिक स्तर से विश्वविद्यालय स्तर तक उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति, आधुनिक पाठ्यक्रम निर्माण, तकनीकी एकीकरण तथा सरकारी कार्यालयों में उर्दू के प्रयोग को प्रोत्साहित करने पर बल दिया. प्रो मंसूरी ने कहा कि आधुनिक बिहार के निर्माता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार उर्दू के विकास हेतु सकारात्मक एवं संवेदनशील पहल कर रही है. राज्य में उर्दू की उन्नति के लिए व्यावहारिक कदम लगातार उठाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि उर्दू एवं हिंदी भाषा का विकास सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है तथा सभी भाषाओं के उन्नयन के लिए ठोस कदम उठाये गये हैं. उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में 22 हजार से अधिक उर्दू शिक्षकों की बहाली की जा चुकी है तथा लगभग 11 हजार तालीमी मरकज़ कार्यरत हैं, जो उर्दू शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. मदरसा शिक्षा के आधुनिकीकरण एवं बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति पर भी सरकार की विशेष प्राथमिकता है तथा शीघ्र ही मदरसा शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया प्रारंभ की जायेगी. अपने वक्तव्य में डॉ मंसूर फरीदी ने कहा कि उर्दू किसी एक समुदाय या वर्ग की भाषा नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष की साझा विरासत है, जिस पर किसी का एकाधिकार नहीं हो सकता. एडीएम अरुण कुमार सिंह ने उर्दू को दिलों को जोड़ने वाली तथा गंगा-जमुनी संस्कृति को सुदृढ़ करने वाली भाषा बताया. कार्यक्रम में प्रो सिद्धेश्वर कश्यप, डॉ शहरयार अहमद, प्रो भूपेंद्र मधेपुरी, डॉ रोजीना, डॉ शबनम आफताब रहमानी सहित अनेक गणमान्य शिक्षाविद, साहित्यकार एवं बुद्धिजीवी उपस्थित रहे. मंच संचालन का कार्य डॉ इम्तियाज रहमानी ने अत्यंत प्रभावशाली ढंग से संपन्न किया. इस भव्य आयोजन में स्थानीय एवं बाह्य साहित्यकारों, शिक्षाविदों, कवियों एवं कवयित्रियों ने अपने विचार एवं काव्य प्रस्तुतियां दी. कार्यक्रम के समापन अवसर पर मो सरवर आलम अंसारी ने जिलेवासियों, उर्दू प्रेमियों, दूर-दराज से आये अतिथियों समस्त श्रोताओं तथा जिले में पदस्थापित सभी उर्दू कर्मियों को बधाई एवं धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम के सफल समापन की घोषणा की. यह आयोजन जिले सहित पूरे बिहार में उर्दू भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं विकास की दिशा में नई ऊर्जा एवं प्रेरणा प्रदान करने वाला सिद्ध हुआ.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Kumar Ashish

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >