मधेपुरा जिले के आलमनगर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व राजद विधायक प्रत्याशी नवीन कुमार निषाद ने शनिवार को विभिन्न बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया. उन्होंने बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया और प्रभावित परिवारों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं. इस दौरान उन्होंने राहत व्यवस्था की जमीनी स्थिति की भी जानकारी ली.
कई परिवारों को राहत नहीं मिलने का आरोप
निरीक्षण के बाद नवीन कुमार निषाद ने कहा कि बाढ़ से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हैं, लेकिन कई पीड़ित परिवार अब भी सरकारी राहत से वंचित हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राहत बांटने में स्थानीय स्तर पर भेदभाव किया जा रहा है. उनका कहना था कि इससे जरूरतमंद परिवारों तक पूरी मदद नहीं पहुंच पा रही है.
प्रशासन के निर्देशों का पालन नहीं होने की बात
नवीन कुमार निषाद ने कहा कि जिला पदाधिकारी ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिये हैं. इसके बावजूद कई जगहों पर इन निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है. उन्होंने कहा कि कई परिवारों को सूखा राशन और पशु आहार नहीं मिला है. वहीं, जरूरत वाले कई इलाकों में सामूहिक रसोई भी शुरू नहीं की गयी है.
इन इलाकों को पूर्ण बाढ़ प्रभावित घोषित करने की मांग
उन्होंने प्रशासन से आलमनगर प्रखंड के किशनपुर रतवाड़ा पंचायत, खापुर, गंगापुर, ईटहरी और कुंजौरी को पूर्ण बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की मांग की. इसके अलावा चौसा प्रखंड के लौआलगान पूर्वी, लौआलगान पश्चिमी, पैना, मोरसंडा, चिरौरी, फुलौत पूर्वी और फुलौत पश्चिमी को भी पूर्ण बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की मांग रखी.
किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा मिले
नवीन निषाद ने कहा कि बाढ़ के पानी से किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है. इसलिए प्रभावित किसानों की फसल क्षति का जल्द सर्वे कराया जाना चाहिए. उन्होंने किसानों को उचित मुआवजा देने और पात्र बाढ़ पीड़ित परिवारों को आपदा राहत राशि उपलब्ध कराने की मांग की.
हर परिवार को राशन और पशु चारा देने की मांग
उन्होंने प्रशासन से प्रत्येक प्रभावित परिवार तक सूखा राशन, पशु चारा और दूसरी जरूरी सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की. उन्होंने कहा कि बाढ़ के समय लोगों के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए.
बोले- राहत में राजनीति नहीं, इंसानियत जरूरी
नवीन कुमार निषाद ने कहा कि आपदा के समय राजनीति और भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता के आधार पर राहत कार्य चलाया जाना चाहिए. कोई भी वास्तविक बाढ़ पीड़ित परिवार सरकारी सहायता से वंचित नहीं रहे, यह प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए.
बाढ़ पीड़ितों की आवाज उठाते रहेंगे
उन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ितों की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा. जब तक प्रभावित परिवारों को उनका हक नहीं मिल जाता, तब तक वे उनकी समस्याओं को प्रशासन और सरकार के सामने उठाते रहेंगे.