मोन केना-केना ने करै छै... है फंक्शनल डिस्पेप्सिया का लक्षण: डॉ मनीष

मोन केना-केना ने करै छै... है फंक्शनल डिस्पेप्सिया का लक्षण: डॉ मनीष

एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया व आइएमए की ओर से संगोष्ठी का हुआ आयोजन कहा, तनाव, खान-पान में गड़बड़ी, मानसिक अस्थिरता, भागमभाग का जीवन और कम शारीरिक गतिविधि के कारण लोग हो रहे हैं इस मर्ज के मरीज मधेपुरा सुपौल व सहरसा में है इस तरह के मरीजों की बहुतायत, सही दवा व स्वस्थ जीवनशैली से संभव है उपचार मधेपुरा. एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया (बिहार शाखा) व आइएमए (मधेपुरा शाखा) के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी में मौजूद एएसआइ बिहार शाखा के अकादमिक काउंसिल के अध्यक्ष डॉ अशोक कुमार सिन्हा ने बताया कि आज-कल आमजनों में गैस और डकार की शिकायत के साथ मोटापे की समस्या प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है. इस बात को ध्यान में रखते हुए आज की संगोष्ठी का आयोजन किया गया है. आइएमए के जिला शाखा के सचिव डॉ अमित आनंद ने बताया कि संपूर्ण बिहार की तरह मधेपुरा सहित आसपास के जिलों में भी यह बीमारी घर-घर की कहानी बन गयी है. हर घर में गैस की शिकायत, अपच की शिकायत व इसके चलते रोज के काम-काज में बाधा पड़ने की शिकायत बढ़ रही है. इसलिए इस संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, ताकि आमजनों को इसके लक्षण, जांच, बचाव तथा इलाज के बारे में पूर्ण जानकारी दी जा सके. मानसिक अस्थिरता के कारण होता है डिजऑर्डर आइजीआइएमएस के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष व चिकित्सक अधीक्षक डॉ मनीष मंडल ने कहा कि आज का विषय फंक्शनल डिस्पेप्सिया का मैथिली रूपांतरण है. मोन केना-केना ने करै छै… इसका मतलब है कि पेट में भारीपन, पेट फूला हुआ रहना, पेट में गैस की शिकायत, अपच की शिकायत, उल्टी जैसा मन होना तथा पेट में मीठा दर्द के साथ सिर में भारीपन और शरीर में कमजोरी के लक्षण रहते हैं. यह देखा गया है कि तनाव, खान-पान में गड़बड़ी, मानसिक अस्थिरता, भागमभाग का जीवन और कम शारीरिक गतिविधि के कारण उपरोक्त लक्षण मरीजों में पाए जाते हैं. अतः इन चीजों से निजात पाना ही मरीज का पहला इलाज है. इसलिए नियमित संतुलित खान-पान, प्रतिदिन व्यायाम तथा नियमित जीवनशैली ही इस बीमारी से बचाव व इलाज का पहला मूलमंत्र है. डॉ मंडल ने बताया कि इसके इलाज में आंत की चाल को नियंत्रित करने की दवा प्रोकाइनेटिक के साथ प्रीबायोटिक और प्रोबायोटिक दिया जाता है, जिससे मरीज का आंत सुचारू रूप से क्रियाशील हो जाता है. इसके साथ मानसिक तनाव कम करने की दवा, गहरी नींद आने की दवा और कहीं-कहीं पर डिप्रेशन की दवा , गैस की दवा के साथ दो-तीन महीने तक लेने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है. गैस व मोटापा बनती जा रही है आम बीमारी आइजीआइएमएस के सर्जिकल गैस्ट्रो विभाग के अपर प्राध्यापक डॉ साकेत कुमार ने कहा कि आज के समय में मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है और चुनिंदा मरीजों में बैरीएट्रिक सर्जरी प्रभावी और सुरक्षित उपचार विकल्प के रूप में उभर रही है. इसमें दूरबीन विधि द्वारा मरीज के खाने की थैली को काटकर छोटा किया जाता है. साथ ही आंत को छोटी आंत से अलग स्थान पर जोड़ा जाता है ताकि, उसकी पाचन क्रिया को बदला जा सके. इससे मोटापा एक महीने के अंदर कम होने लगता है. इस दूरबीन विधि को स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी कहते हैं. संगोष्ठी का उद्घाटन आइएमए बिहार शाखा के अध्यक्ष डॉ धीरेंद्र कुमार यादव व एएसआइ बिहार शाखा के अकादमिक काउंसिल के अध्यक्ष डॉ अशोक कुमार सिन्हा ने किया. मनीष के आने से बढ़ा एकेडमिक स्तर डॉ धीरेंद्र ने कहा कि डॉ मनीष मंडल के मधेपुरा में समय देने से यहां के चिकित्सकों का अकादमिक स्तर तो बढ़ेगा ही. साथ ही मधेपुरा की जनता को जो पटना के आइजीआइएमएस में सहायता मिलती है, उसी प्रकार मधेपुरा में भी स्थानीय स्वास्थ्य संबंधी मदद मिल सकेगी. डॉ सिन्हा ने कहा कि डॉ मनीष मंडल ऐसे व्यक्तित्व हैं जो न सिर्फ मधेपुरा, बिहार और देश बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ सर्जन्स के गवर्नर बनकर सभी लोगों का मान-सम्मान बढ़ाया है और मधेपुरा का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्ज कराया है. मौके पर डॉ धीरेंद्र कुमार यादव, डॉ एसएन यादव, डॉ मिथिलेश कुमार, डॉ यूके राजा, डॉ राजेंद्र गुप्ता, डॉ नृपेंद्र कुमार सिंह, डॉ सरोज सिंह, डॉ पी टुटी, डॉ दिलीप कुमार सिंह, डॉ एलके लक्ष्मण, डॉ आलोक निरंजन, डॉ वरुण कुमार, डॉ संतोष कुमार, डॉ ओम नारायण यादव, डॉ अंजनी कुमार, डॉ पी भास्कर, डॉ अलका सिंह व डॉ नायडू कुमारी समेत सुधांशु कुमार आदि उपस्थित थे.

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By Kumar Ashish

Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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