मधेपुरा में 111.46 रुपये लीटर पहुंचा पेट्रोल, बढ़ती महंगाई से लोगों की बढ़ी टेंशन

Madhepura Petrol Price Shock: मधेपुरा में फिर बढ़े पेट्रोल के दाम. ऑटो चालक से लेकर गृहिणियों तक हर कोई परेशान, बाजार पर भी दिखने लगा असर

Madhepura Petrol Price Shock: अमन श्रीवास्तव, मधेपुरा. मधेपुरा में पेट्रोल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. ताजा रेट के मुताबिक शहर में पेट्रोल की कीमत 111.46 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है. लगातार बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन की कीमतों में यह उछाल लोगों के घरेलू बजट पर सीधा असर डाल रहा है.

पेट्रोल महंगा होते ही बिगड़ने लगा घर का बजट

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले से ही सब्जी, राशन और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ी हुई हैं. अब पेट्रोल महंगा होने से रोजमर्रा का खर्च और बढ़ गया है. मध्यम वर्गीय परिवारों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए हालात ज्यादा मुश्किल होते जा रहे हैं.

गृहिणी श्रुति कुमारी ने बताया कि रसोई का खर्च पहले ही बढ़ चुका है. पेट्रोल की कीमत बढ़ने से अब बाजार में हर चीज महंगी हो जाएगी. ऐसे में घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है.

ऑटो और ई-रिक्शा चालकों पर सबसे ज्यादा असर

पेट्रोल महंगा होने का सबसे ज्यादा असर परिवहन क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है. शहर के ऑटो चालक और छोटे व्यापारी बढ़ती लागत से परेशान हैं. ऑटो चालक राजेश कुमार ने कहा कि रोज की कमाई का बड़ा हिस्सा अब पेट्रोल में ही खर्च हो जाता है.

उन्होंने बताया कि किराया बढ़ाने की कोशिश करने पर यात्री नाराज हो जाते हैं, जबकि खर्च लगातार बढ़ रहा है. वहीं ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि बैटरी चार्जिंग और अन्य खर्चों में भी इजाफा हुआ है, जिससे उनकी बचत कम हो गई है.

व्यापार और बाजार पर भी दिखने लगा असर

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि माल ढुलाई महंगी होने से सामान की लागत बढ़ रही है. इसका असर बाजार में ग्राहकों की संख्या पर भी पड़ रहा है. कई दुकानदारों का कहना है कि लोग अब जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी कर रहे हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और टैक्स संरचना का असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है. हालांकि आम जनता के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा का खर्च है.

लोग तलाश रहे सस्ते विकल्प

पेट्रोल के बढ़ते दामों के बीच अब कई लोग साइकिल, पैदल चलने और कार-पूलिंग जैसे विकल्पों की ओर भी ध्यान देने लगे हैं. हालांकि लोग मानते हैं कि ये उपाय सीमित हैं और समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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