ग्वालपाड़ा में आंधी-बारिश का कहर, फसल और बिजली व्यवस्था प्रभावित

Madhepura news: तेज हवा और बारिश के कारण खेतों में लगी मक्का की फसल गिर गयी. खेतों में रखे भुट्टे और सुखाये जा रहे मक्का के दाने भी बारिश में भीग गये, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गयी है. किसानों ने बताया कि पानी लगने से मक्का के दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है.

ग्वालपाड़ा (मधेपुरा) से प्रतिनिधि की रिपोर्ट:

Madhepura news: मधेपुरा जिले के ग्वालपाड़ा प्रखंड में सोमवार रात आयी तेज आंधी और बारिश से जनजीवन प्रभावित हो गया. खराब मौसम के कारण किसानों की फसल को भारी नुकसान पहुंचा, वहीं कई जगह बिजली व्यवस्था भी चरमरा गयी.

आंधी का असर आम और लीची के बागानों पर भी पड़ा. तेज हवा के कारण पेड़ों से बचे हुए फल टूटकर गिर गये, जिससे बागवानों को नुकसान हुआ है. कई जगह पशुओं के लिए रखा चारा भी भीगकर खराब हो गया.

आंधी बारिश के बाद टूटकर गिरा पेड़

बारिश के बाद ग्वालपाड़ा बाजार और आसपास के इलाकों में पानी और कीचड़ जमा हो गया, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी हुई.

इधर तेज हवा के कारण कई जगह बिजली के तारों पर पेड़ और बांस गिर गये, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित हो गयी. बिजली विभाग के जेई निलेश कुमार ने बताया कि कई जगहों पर तार क्षतिग्रस्त होने से कुछ घंटों तक बिजली बंद रही. बाद में विभाग की टीम ने मरम्मत कर बिजली आपूर्ति बहाल की.

स्थानीय लोगों के अनुसार, तेज आंधी में कई कच्चे और चदरा वाले घरों को भी नुकसान पहुंचा है. कुछ घरों की छत उड़ जाने से परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ा.

ग्रामीणों का कहना है कि आंधी और बारिश ने गर्मी से राहत तो दी, लेकिन फसल और जनजीवन को काफी नुकसान पहुंचाया है.

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Published by: Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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