उदाकिशुनगंज (मधेपुरा) अनुमंडल मुख्यालय स्थित एसबीजेएस मैदान में करीब तीन-चार वर्ष पूर्व करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित स्टेडियम और खिलाड़ियों के ठहरने के लिए बनाया गया भवन आज उपेक्षा का शिकार है. उद्घाटन नहीं होने और नियमित रखरखाव के अभाव में पूरा परिसर जर्जर होता जा रहा है. असामाजिक तत्वों ने भवन में लगे अधिकांश सामान उखाड़ लिए हैं, जबकि शाम होते ही परिसर नशेड़ियों का अड्डा बन जाता है.
चोरी हो चुके हैं भवन के अधिकांश सामान
स्थानीय लोगों के अनुसार भवन में लगे गेट, खिड़कियां, पंखे, बिजली के स्विच बोर्ड, पानी की टंकी सहित कई जरूरी सामान चोरी हो चुके हैं. कमरों और शौचालयों के दरवाजे भी गायब हैं. भवन के भीतर गंदगी का अंबार लगा है और कई कमरों में फैली दुर्गंध के कारण लोगों को वहां से गुजरने में भी परेशानी होती है.
शाम ढलते ही जुटते हैं असामाजिक तत्व
ग्रामीणों का कहना है कि शाम होते ही स्टेडियम परिसर में नशेड़ियों का जमावड़ा लग जाता है. इसके कारण आसपास टहलने आने वाले लोग भी खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं. पुलिस ने संध्या गश्ती के दौरान कई बार नशेड़ियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है, लेकिन स्थायी निगरानी नहीं होने से स्थिति जस की तस बनी हुई है.
उद्घाटन नहीं होने से उपयोग में नहीं आ सका स्टेडियम
जानकारी के अनुसार निर्माण कार्य पूरा होने के बाद संवेदक ने स्टेडियम भवन विद्यालय के प्रधानाध्यापक को हस्तांतरित कर दिया था. इसके बावजूद विभागीय स्तर पर उद्घाटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी. वर्षों से उपयोग नहीं होने के कारण भवन लगातार जर्जर होता गया और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों का केंद्र बन गया.
प्रधानाचार्य बोले, विभाग को दी जा चुकी है सूचना
विद्यालय के प्रधानाचार्य अभिनंदन कुमार ने बताया कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद करीब तीन-चार वर्ष पहले स्टेडियम विद्यालय को हैंडओवर कर दिया गया था. इसकी सूचना संबंधित विभाग को भी दे दी गई थी, लेकिन अब तक उद्घाटन नहीं हो सका. इसके पीछे क्या कारण है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है.
नगर परिषद ने दिया मरम्मत और सुरक्षा का भरोसा
नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कमलेश कुमार ने कहा कि यदि स्टेडियम परिसर और भवन नगर परिषद को हस्तांतरित किया जाता है, तो उसकी मरम्मत कराकर आवश्यक सुविधाएं बहाल की जाएंगी. साथ ही भवन की सुरक्षा के लिए रात्रि प्रहरी की तैनाती भी की जाएगी, ताकि इसे असामाजिक तत्वों से सुरक्षित रखा जा सके.
