नौकरी छोड़ स्वरोजगार चुना, अब दूसरों को दे रहा काम

Madhepura news: राहुल ने राजनीति विज्ञान विषय से स्नातक में विश्वविद्यालय टॉपर बनकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था. परिवार और गांव के लोगों को उम्मीद थी कि वह किसी बड़ी सरकारी नौकरी में जाएंगे, लेकिन आर्थिक तंगी और परिस्थितियों ने उन्हें अलग राह चुनने को मजबूर कर दिया. आज वही राहुल अपनी मेहनत और लगन के दम पर प्रिंटिंग व्यवसाय में एक पहचान बना चुके हैं.

मधेपुरा से कुमार आशीष की रिपोर्ट:

Madhepura news: कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों, तो हालात भी रास्ता नहीं रोक पाते. मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत नवटोल गांव के राहुल ने इस कहावत को सच कर दिखाया है. जिस उम्र में युवा नौकरी की तलाश में दर-दर भटकते हैं, उस उम्र में राहुल खुद का व्यवसाय खड़ा कर दर्जनों लोगों को रोजगार देने का काम कर रहे हैं.

राहुल ने राजनीति विज्ञान विषय से स्नातक में विश्वविद्यालय टॉपर बनकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था. परिवार और गांव के लोगों को उम्मीद थी कि वह किसी बड़ी सरकारी नौकरी में जाएंगे, लेकिन आर्थिक तंगी और परिस्थितियों ने उन्हें अलग राह चुनने को मजबूर कर दिया. आज वही राहुल अपनी मेहनत और लगन के दम पर प्रिंटिंग व्यवसाय में एक पहचान बना चुके हैं.

आर्थिक संकट ने बदली जिंदगी की दिशा.

राहुल बताते हैं कि उनके पिता बीमार रहने लगे थे और परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही थी. घर की जिम्मेदारियां बढ़ रही थीं. ऐसे में नौकरी की तैयारी जारी रखना आसान नहीं था. कई बार प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता भी मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.

उन्होंने तय किया कि नौकरी की प्रतीक्षा करने से बेहतर है खुद कुछ नया किया जाये. इसी सोच के साथ उन्होंने छोटे स्तर पर फ्लेक्स और पेपर प्रिंटिंग का काम शुरू किया. शुरुआत में पूंजी की भारी कमी थी. राहुल ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत ऋण लेकर करीब 90 हजार रुपये से व्यवसाय की नींव रखी.

दोस्तों ने बढ़ाया हौसला.

राहुल कहते हैं कि शुरुआती दिनों में उनके दोस्तों ने काफी सहयोग किया. मित्र मन्नू, उत्पल और अभिषेक ने न केवल उनका मनोबल बढ़ाया, बल्कि व्यवसाय को आगे बढ़ाने में भी मदद की. धीरे-धीरे काम बढ़ने लगा और लोगों का भरोसा भी मिलने लगा.

आज राहुल के यहां शादी-विवाह, राजनीतिक कार्यक्रम, शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न आयोजनों के लिए फ्लेक्स, कार्ड, पोस्टर और बैनर प्रिंट किये जाते हैं. कम समय में बेहतर काम और गुणवत्ता के कारण बाजार में उनकी अलग पहचान बन गयी है.

दो दर्जन लोगों को मिला रोजगार.

राहुल ने अपने छोटे से प्रयास को बड़े अवसर में बदल दिया. वर्तमान में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब दो दर्जन लोग उनके व्यवसाय से जुड़े हैं. कोई मशीन चलाता है, तो कोई डिजाइनिंग और डिलीवरी का काम करता है.

राहुल मानते हैं कि सफलता केवल खुद आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों को भी आगे बढ़ाने में है. वह कहते हैं कि गांव के युवाओं को नौकरी के पीछे भागने के बजाय स्वरोजगार की दिशा में भी सोचना चाहिए.

युवाओं के लिए मिसाल बना राहुल.

राहुल की कहानी आज जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है. उन्होंने यह साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर मेहनत और धैर्य साथ हो तो सफलता जरूर मिलती है.

विश्वविद्यालय टॉपर से सफल उद्यमी बनने तक का राहुल का सफर यह संदेश देता है कि संघर्ष कभी बेकार नहीं जाता. जरूरत सिर्फ खुद पर भरोसा रखने और लगातार आगे बढ़ते रहने की होती है.

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Published by: Shruti Kumari

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