Madhepura News: मधेपुरा कॉलेज के एनसीसी कैडेट कपिलदेव कुमार ने. देश के सबसे कठिन और प्रतिष्ठित एनसीसी कैंपों में शुमार 'ऑल इंडिया थल सैनिक कैंप' (TSC) में कपिलदेव ने अपनी बंदूक से ऐसा सटीक निशाना लगाया कि पूरे देश में बिहार-झारखंड का परचम लहरा गया. मधेपुरा की माटी के इस लाल की बदौलत बिहार-झारखंड डायरेक्टरेट ने ऑल इंडिया लेवल पर दूसरा स्थान हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया है.
जब मधेपुरा की बंदूक ने साधा राष्ट्रीय निशाना
17 बिहार बटालियन एनसीसी, मधेपुरा कॉलेज के कैडेट कपिलदेव कुमार की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से न केवल कॉलेज परिसर बल्कि पूरा मधेपुरा जिला और कोसी प्रमंडल गौरवान्वित महसूस कर रहा है. ऑल इंडिया थल सैनिक कैंप की प्रतिष्ठित शूटिंग प्रतियोगिता में देश भर के अलग-अलग राज्यों और डायरेक्टरेट के चुनिंदा कैडेट्स के बीच जबरदस्त होड़ देखने को मिली थी. इस कठिन चुनौती के बीच कपिलदेव ने अपनी एकाग्रता, शानदार ट्रेनिंग और अद्वितीय शूटिंग कौशल का परिचय देते हुए बिहार-झारखंड टीम को राष्ट्रीय स्तर पर उपविजेता का खिताब दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई.
कैंप से लौटते ही कॉलेज में ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ हुआ भव्य स्वागत
राष्ट्रीय स्तर पर परचम लहराने के बाद जब कैडेट कपिलदेव मधेपुरा कॉलेज परिसर लौटे, तो उनका स्वागत किसी नायक की तरह किया गया. पूरे कॉलेज परिसर में जश्न का माहौल बन गया. एनसीसी अधिकारी मेजर डॉ. गौतम कुमार और साथी कैडेट्स ने उन्हें अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया. साथ ही एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इस ऐतिहासिक जीत की खुशियां बांटीं. अपने साथी की इस शानदार सफलता को देखकर अन्य छात्र-छात्राओं और कैडेटों के चेहरे भी गर्व से खिल उठे.
अनुशासन, त्याग और सालों की कड़ी मेहनत का प्रतिफल
इस स्वर्णिम सफलता पर कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. पूनम यादव ने अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि कपिलदेव का टीसीएस जैसे कठिन कैंप के लिए बिहार-झारखंड निदेशालय की टीम में चुना जाना ही अपने आप में पूरे कॉलेज परिवार के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण था. थल सैनिक कैंप देश के सबसे कठिन सैन्य प्रशिक्षण कैंपों में से एक माना जाता है, जहां जगह बनाने के लिए कैडेट्स को महीनों तक कठोर शारीरिक और मानसिक परीक्षा से गुजरना पड़ता है. यह सफलता कपिल की दिन-रात की मेहनत, अनुशासित जीवनशैली और बेहतरीन प्रशिक्षण का ही परिणाम है.
कठिन राहों से निकलकर राष्ट्रीय पटल पर बनाई पहचान
एनसीसी पदाधिकारी मेजर डॉ. गौतम कुमार ने बताया कि थल सैनिक कैंप (TSC) के लिए चयन प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और अत्यंत कठिन होती है. हजारों कैडेट्स में से केवल सर्वश्रेष्ठ कैडेट ही कड़ी छंटनी के बाद इस मुकाम तक पहुंच पाते हैं. कपिलदेव ने अपनी निष्ठा और प्रतिभा से न केवल अपने कॉलेज का मान बढ़ाया है, बल्कि पूरे बिहार-झारखंड निदेशालय का नाम राष्ट्रीय स्तर पर ऊंचा किया है. उनकी यह सफलता जिले के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी कि सीमित साधनों के बावजूद कड़ी मेहनत से किसी भी राष्ट्रीय मुकाम को हासिल किया जा सकता है.
Madhepura News: संस्थान का मार्गदर्शन और युवाओं में नया उत्साह
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि संस्थान हमेशा से अपने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, देशभक्ति और सैन्य सेवा के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहा है. कपिलदेव की यह सफलता कॉलेज के अन्य एनसीसी कैडेट्स को भी सेना और राष्ट्र सेवा की ओर कदम बढ़ाने के लिए नया संबल प्रदान करेगी. इस गौरवमयी अवसर पर डॉ. भगवान कुमार मिश्रा, एनसीसी कैडेट विकास कुमार, भवेश कुमार, सिंपल कुमारी, प्रीति यादव सहित कई प्राध्यापक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में कैडेट्स उपस्थित रहे और सबने कपिलदेव के उज्ज्वल भविष्य की कामना की.
